Guru Purnima: 29 जुलाई को मनेगी गुरु पूर्णिमा, मंदिरों में तैयारियां तेज

दादाजी की कुटी में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
Guru Purnima: बैतूल। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व इस वर्ष 29 जुलाई को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिले के मंदिरों, आश्रमों और धार्मिक स्थलों पर तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालु अपने गुरु का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे, वहीं विभिन्न धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, सत्संग और महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।
पंचांग के अनुसार गुरु पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे प्रारंभ होगी, जो 29 जुलाई को रात 8:05 बजे तक रहेगी। पूजा-अर्चना के लिए शुभ समय 29 जुलाई को सुबह 5:41 बजे से 9:05 बजे तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु अपने गुरु, संत-महात्माओं और आध्यात्मिक मार्गदर्शकों का पूजन कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करेंगे। सनातन परंपरा में गुरु पूर्णिमा को ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व माना जाता है। महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी इस दिन का विशेष महत्व है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
50 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
बैतूल के खंजनपुर स्थित प्रसिद्ध दादाजी की कुटी में गुरु पूर्णिमा का पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी भव्य रूप से मनाया जाएगा। यहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। दादाजी कुटी समिति के अध्यक्ष प्रवीण भावसार ने बताया कि इस वर्ष करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के दर्शन और प्रसादी ग्रहण करने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भोजन, पेयजल, पार्किंग, साफ-सफाई और व्यवस्था संबंधी सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
प्रसादी में बांटेगी टिक्कड़ और चटनी
गुरु पूर्णिमा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। प्रसादी में लगभग 13 क्विंटल टिक्कड़, 20 क्विंटल पूड़ी, 1.50 क्विंटल हलवा और 13 क्विंटल सब्जी तैयार की जाएगी। विशेष रूप से दादाजी की कुटी की पारंपरिक टिक्कड़-चटनी प्रसादी श्रद्धालुओं के बीच आस्था और स्वाद का प्रमुख आकर्षण रहती है। बड़ी संख्या में स्वयंसेवक प्रसादी निर्माण और वितरण की व्यवस्था में जुटेंगे।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दादाजी की कुटी में सुबह से ही पूजा-अर्चना, गुरु वंदन, भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू होगा। श्रद्धालु दादाजी के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार के मंगल की कामना करेंगे। जिले सहित आसपास के कई क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दादाजी की कोठी में निशान भी चढ़ाया जाएगा।
धार्मिक मान्यता है कि गुरु ही जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। इसलिए गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। बैतूल में भी इस दिन धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलेगा और पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहेगा।
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