Betul Ki Khabar: झिलमिलाते दीपों से रोशन होगी अमावस्या की रात
Betul Ki Khabar: Amavasya night will be illuminated with twinkling lamps

कल दीप पर्व की तैयारियां जोरों पर, घर आंगन में जलेंगे दीप, आतिशबाजी से रंगीन होगा आसमान
Betul Ki Khabar: बैतूल। जिलेभर में दीपावली पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं। धनतेरस और रूप चौदस के बाद सोमवार को कार्तिक अमावस्या की तिथि पर दीपावली का पर्व पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। रविवार को दिनभर बाजारों में रौनक देखने को मिली। लोग पूजा सामग्री, मिठाई, खील-बताशे, मोरपंख, झाड़ू, कमल और गेंदे के फूलों की खरीदारी में जुटे रहे। बाजारों में भीड़ के कारण देर रात तक खरीदारी का सिलसिला चलता रहा।
दीपावली के अवसर पर लोग अपने घरों और आंगनों की सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट में व्यस्त हैं। सोमवार सुबह से ही घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थी। आंगन लीपकर सुंदर रंगोलियां बनाई जाएंगी। शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दीपावली की शुभकामनाओं का सिलसिला भी तेज हो गया है।
मिट्टी के दीपक से रोशन होंगे घर
दीपावली के दिन मिट्टी के दीपक जलाने और मिट्टी से बनी लक्ष्मी प्रतिमा की पूजा करने की परंपरा है। इस दिन मोरपंख, झाड़ू और कमल के फूल का विशेष महत्व माना गया है। माना जाता है कि झाड़ू लक्ष्मी का प्रतीक है और इसका पूजन करने से घर में समृद्धि आती है। दीपावली के अवसर पर खील-बताशे और मिठाई का प्रसाद बांटने की परंपरा भी निभाई जाती है। जिले के कई स्थानों पर लक्ष्मी प्रतिमाएं सामूहिक रूप से स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी।
आतिशबाजी से रंग-बिरंगा होगा आसमान
कार्तिक अमावस्या की रात आतिशबाजी और पटाखों से पूरा आसमान रंगीन हो जाएगा। गणेश-लक्ष्मी पूजन के बाद लोग पटाखे फोड़कर अपनी खुशियां मनाएंगे। बच्चे सुबह से ही पटाखों को लेकर उत्साहित हैं। प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों ने इस बार लोगों से ग्रीन पटाखों का उपयोग करने की अपील की है, ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
सरसों तेल से दीप जलाने की परंपरा
आदिवासी बहुल बैतूल जिले में दीपावली का पर्व विशेष पारंपरिक स्वरूप में मनाया जाता है। यहां के ग्रामीण क्षेत्रों में करंजी या सरसों के तेल से दीप जलाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। महंगाई के बावजूद लोगों में उत्साह की कमी नहीं है। करंज तेल की कीमतें बढ़ने के बाद भी लोग परंपरा निभाने के लिए इसे खरीद रहे हैं।
समृद्धि और सौभाग्य का पर्व
हिंदू धर्म का यह सबसे बड़ा पर्व धनतेरस से शुरू होकर पांच दिनों तक चलता है। दीपावली के दिन मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु, गणेश और कुबेर की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन इन देवताओं की आराधना करने से घर में धन, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। दीपों की जगमगाहट और भक्तिभाव से ओत-प्रोत दीपावली का यह पर्व न केवल अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश भी देता है।




