Betul Samachar: पड़ोसी जिले के रेलवे स्टेशन बनकर तैयार, बैतूल में काम फिसड्डी

ढाई साल बाद भी काम पूरा नही, निर्माण कार्य पर उठ रहे सवाल
Betul Samachar: बैतूल। भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है ताकि यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें, लेकिन बैतूल जिले में इस योजना की रफ्तार बेहद धीमी साबित हो रही है।
स्थिति यह है कि पड़ोसी छिंदवाड़ा जिले के छिंदवाड़ा और जुन्नारदेव रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास कार्य पूरा हो चुका है और उनका लोकार्पण भी प्रधानमंत्री द्वारा किया जा चुका है। वहां यात्रियों को नई सुविधाओं का लाभ मिलने लगा है, जबकि बैतूल जिले के रेलवे स्टेशन अब भी अधूरे पड़े हैं।
जानकारी के अनुसार अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बैतूल जिले के बैतूल, आमला, घोड़ाडोंगरी और मुलताई रेलवे स्टेशनों का लगभग 93 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया जा रहा है। इन स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से निर्माण कार्य शुरू हुए ढाई वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक केवल करीब 60 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है।
निर्माण की धीमी गति के कारण यात्रियों को अभी भी पुरानी सुविधाओं के सहारे सफर करना पड़ रहा है। सबसे अधिक चर्चा बैतूल रेलवे स्टेशन की हो रही है, जहां निर्माण कार्य की रफ्तार लगातार सवालों के घेरे में है। यात्रियों का कहना है कि लंबे समय से स्टेशन परिसर में निर्माण कार्य चलने के कारण उन्हें असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर निर्माण सामग्री पड़ी रहने से आवाजाही प्रभावित होती है, वहीं स्टेशन का स्वरूप भी अधूरा दिखाई देता है।
बार-बार नक्शे में बदलाव से बढ़ रही देरी
स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान बार-बार नक्शे (डिजाइन) में बदलाव किए जाने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। पहले से स्वीकृत कार्यों में संशोधन होने के चलते निर्माण एजेंसी को कई हिस्सों में दोबारा काम करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर निर्माण की गति पर पड़ रहा है और तय समय-सीमा बार-बार आगे बढ़ानी पड़ रही है।
लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही अंतिम डिजाइन तय कर लिया जाता तो अब तक स्टेशन पूरी तरह तैयार हो चुके होते। रेलवे यात्रियों को उम्मीद थी कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत जल्द ही उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेशन मिलेंगे, लेकिन निर्माण कार्य में हो रही देरी से उनकी उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। रोजाना हजारों यात्री इन स्टेशनों से सफर करते हैं, जिन्हें निर्माण कार्य के बीच अस्थायी व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।
यह सुविधाएं मिलेंगी स्टेशन पर
पुनर्विकास कार्य पूरा होने के बाद बैतूल जिले के चारों रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे। स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारों को आकर्षक एवं भव्य स्वरूप दिया जाएगा। यात्रियों के लिए आधुनिक वेटिंग हॉल और एग्जीक्यूटिव लाउंज बनाए जा रहे हैं। प्लेटफॉर्म तक आसान पहुंच के लिए चौड़े फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट और एस्केलेटर लगाए जाएंगे।
इसके अलावा दिव्यांगजन के लिए विशेष सुविधाएं, सभी प्लेटफॉर्मों पर बेहतर शेड, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, शुद्ध पेयजल, आधुनिक शौचालय, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, डिजिटल सूचना प्रणाली और स्टेशन परिसर का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा।
समय पर पूरा हो तो मिलेगा बड़ा लाभ
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि बैतूल, आमला, घोड़ाडोंगरी और मुलताई स्टेशन मध्य भारत के महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर स्थित हैं। इन स्टेशनों का आधुनिकीकरण होने से यात्रियों की सुविधाओं में बड़ा सुधार होगा और क्षेत्र के व्यापार, पर्यटन तथा आवागमन को भी गति मिलेगी। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और निर्धारित समय में इसे पूरा किया जाए।
फिलहाल पड़ोसी जिले के स्टेशन आधुनिक स्वरूप में यात्रियों की सेवा कर रहे हैं, जबकि बैतूल जिले के लोग अब भी अपने रेलवे स्टेशनों के पूरी तरह तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं। रेलवे स्टेशन के निर्माण कार्य को लेकर नागपुर मंडल सीपीएम नवीन पाटिल संपर्क किया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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