Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: बड़े अफसर को लेकर क्यों कहा जा रहा भगवान के यहां देर है, अंधेर नहीं?? सभके नम्बरों का खेल और बेचैनी के पीछे कौनसा राज है??? दो थाना प्रभारियों पर यह कौनसी मेहरबानी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं…

जिले में पदस्थ रह चुके एक चर्चित अधिकारी के नई पदस्थापना स्थल पर गंभीर रूप से बीमार होने की खबर ने प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा उस अफसर की टिप्पणी की हो रही है, जिसे कभी इसी अधिकारी ने एक बैठक में सबके सामने कड़ी फटकार लगाई थी। उस घटना के बाद वह अफसर आहत होकर बैठक से बाहर निकल गया था।

अब बीमारी की खबर मिलते ही उसके मुंह से निकला कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। सूत्र बताते हैं कि कई अधिकारी और कर्मचारी भी इसे समय का न्यायÓ बताकर अपने-अपने अंदाज में व्याख्या कर रहे हैं। हालांकि कुछ लोग इसे महज संयोग मान रहे हैं, लेकिन दफ्तरों की चाय पर इन दिनों यही किस्सा सबसे ज्यादा परोसा जा रहा है।

नंबरों का खेल और साहब की बेचैनी…

मदिरा कारोबार से जुड़े एक साहब इन दिनों खासे चर्चाओं में हैं। चर्चा है कि ठेकेदारों के साथ मिलकर ग्रुप तोड़ने और दुकानों के नंबर बदलने का जो खेल खेला गया, उसके दस्तावेज अब धीरे-धीरे बाहर आने लगे हैं। गलियारों में यह भी फुसफुसाहट है कि मामले की शिकायत लोकायुक्त तक पहुंच चुकी है और कुछ फाइलें जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। दिलचस्प बात यह है कि यही साहब पहले अपने निलंबन पर अदालत से राहत हासिल कर चुके हैं।

ऐसे में अब दफ्तरों की चाय पर सबसे बड़ा सवाल यही उछाला जा रहा है कि इस बार भी साहब कोई कानूनी कवच ढूंढ लेंगे या फिर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा? फिलहाल फाइलों से ज्यादा चर्चा साहब के भविष्य की हो रही है और सबकी नजर अगले घटनाक्रम पर टिकी है।

थाना प्रभारियों पर यह कैसी मेहरबानी?

पुलिस महकमे में फेरबदल और तबादलों का दौर लगातार चलता रहता है, लेकिन जिले के दो थाना प्रभारियों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता। बड़े अधिकारी बदल गए, व्यवस्थाएं बदलीं, लेकिन इनकी कुर्सियां जस की तस बनी हुई हैं। चर्चा है कि एक निरीक्षक स्तर के थाना प्रभारी के क्षेत्र में अवैध गतिविधियां चरम पर हैं, जबकि दूसरे उपनिरीक्षक स्तर के थाना प्रभारी के इलाके में जिले का सबसे बड़ा जुआ अड्डा संचालित होने की बात कही जाती है। इसके बावजूद दोनों पर कार्रवाई तो दूर, कोई आंच तक नहीं आई।

महकमे के गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन दोनों पर ऐसी कौन-सी मेहरबानी है, जो हर बदलाव और कार्रवाई से इन्हें बचा लेती है। फिलहाल दोनों साहब अपने-अपने क्षेत्रों में बेफिक्र होकर मलाई का स्वाद लेते नजर आ रहे हैं। अब देखना यह है कि इन चर्चाओं पर बड़े अफसरों की नजर कब पड़ती है। बताते चले कि निरीक्षक स्तर के अधिकारी शाहपुर और उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी भैंसदेही अनुविभाग में पदस्थ है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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