Fake Caste Certificate: फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाकर लिया आरक्षण और जमीन का लाभ, पिता-पुत्र पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

शिकायत की जांच में खुलासा; एससी-एसटी एक्ट में दर्ज कराए गए मामले की पड़ताल के दौरान सामने आया फर्जीवाड़ा
Fake Caste Certificate: बैतूल। चिचोली क्षेत्र में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग का लाभ लेने का मामला सामने आया है। पुलिस ने जांच के बाद पिता-पुत्र के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग का प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने स्वयं को अनुसूचित जनजाति वर्ग का बताकर आरक्षण सहित अन्य शासकीय लाभ प्राप्त किए और आदिवासी की जमीन भी खरीदी।
पुलिस के अनुसार चिचोली निवासी संजीव सूर्यवंशी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी कि शुभम ने वास्तविक रूप से अन्य सामाजिक वर्ग का होने के बावजूद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वयं को अनुसूचित जनजाति वर्ग का दर्शाया और वर्षों तक शासन की विभिन्न योजनाओं एवं आरक्षण संबंधी लाभों का फायदा उठाया।
शिकायत के बाद पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन के निर्देश पर मामले की जांच अजाक कार्यालय की उप पुलिस अधीक्षक शैफा हाशमी को सौंपी गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ता सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान लिए गए और उपलब्ध दस्तावेजों की पड़ताल की गई।
जांच में सामने आए कई तथ्य
पुलिस जांच में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया कि शुभम और अनूप सूर्यवंशी अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित नहीं हैं। जांच में यह भी पाया गया कि अनूप सूर्यवंशी ने शुभम को अपनी संतान न बताकर अपने यहां कार्यरत एक आदिवासी कर्मचारी की संतान बताया था। इसी आधार पर कथित रूप से अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े दस्तावेज तैयार कराए गए और विभिन्न शासकीय लाभ प्राप्त किए गए।
जांच के दौरान सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन सहित अन्य दस्तावेजों का भी परीक्षण किया गया। अधिकारियों को उपलब्ध साक्ष्यों और कथनों में कई विरोधाभास मिले, जिसके आधार पर फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और मिथ्या जानकारी देकर लाभ लेने की पुष्टि होने की बात कही गई है।
आदिवासी बनकर खरीदी जमीन
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपियों ने स्वयं को अनुसूचित जनजाति वर्ग का बताकर आदिवासी की भूमि खरीदी थी। नियमों के अनुसार अनुसूचित जनजाति वर्ग की भूमि का हस्तांतरण निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत ही किया जा सकता है। शिकायत के बाद इस पूरे मामले की जांच शुरू हुई और कथित फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
ऐसे खुला मामला
पुलिस के अनुसार शुभम द्वारा पूर्व में चिचोली थाने में संजीव सूर्यवंशी के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया गया था। इसके बाद संजीव सूर्यवंशी ने शिकायत देकर दावा किया कि शुभम उनके बड़े भाई अनूप सूर्यवंशी का पुत्र है और वह अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित नहीं है। शिकायत की जांच के दौरान दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल की गई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए।
पिता-पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज
जांच प्रतिवेदन के आधार पर चिचोली थाना पुलिस ने शुभम और अनूप सूर्यवंशी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 468 और 471 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इन धाराओं में प्रतिरूपण कर धोखाधड़ी करना, छलपूर्वक लाभ प्राप्त करना, कूटरचना और कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग करना शामिल है।
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत विवेचना जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
एसपी ने की अपील
पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन ने नागरिकों से अपील की है कि शासकीय योजनाओं और आरक्षण संबंधी लाभ प्राप्त करने के लिए केवल वास्तविक और सत्य दस्तावेजों का ही उपयोग करें। फर्जी जाति प्रमाण पत्र या कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर लाभ लेना गंभीर दंडनीय अपराध है। उन्होंने नागरिकों से ऐसे मामलों की जानकारी पुलिस, अजाक कार्यालय या जिला प्रशासन को देने की भी अपील की है।




