Administrative Corner : प्रशासनिक कोना: कौनसे टल्ली थानेदार मोहन को अपना सीनियर बताकर बुरे फंसे?? आखिर इन साहब ने तबादले के बाद स्टे का खेल क्यों खेला??? बड़े साहब के तेवर से क्यों खफा हो गए अधीनस्थ???? पढ़िए पूरी खबर हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..

Administrative Corner : Which Talli Police Station Officer got into trouble by calling Mohan as his senior?? After all, why did this sir play the game of stay after transfer??? Why did the subordinates get angry with the attitude of the senior boss???? Read the full news in our popular column Administrative Corner...

नशे में यह क्या बोल गए थानेदार साहब!

Administrative Corner : शाम होने के बाद टल्ली होकर धुएं के छल्ले उड़ाने के लिए चर्चित एक थानेदार साहब अपने नए बोल के कारण विवादों में आ गए हैं। तीन दिन पहले नीमपानी के पास एक ढ़ाबे पर अपने टल्ली दोस्तों के साथ पार्टी करने के दौरान जब थानेदार को नशा चढ़ा तो वे बोलने से नहीं चुके कि भोपाल वाले मोहन उनकी जेब में है। जब उनसे टल्ली साथियों ने कारण पूछा तो बहके वाले अंदाज में बताया कि विक्रमादित्य यूनिवसिर्टी में भोपाल वाले मोहन उनके सीनियर थे। बस उनके इतना कहते ही पैक पर पैक बनते गए और बैतूल से नीमपानी के पास ढाबे पर पहुंचे उनके कुछ साथियों ने भी खूब चियर्स किया।

खबर है कि थानेदार ने अपने जिले के सबसे वरिष्ठ कहे जाने वाले अधिकारी के बारे में भी कहा कि वे उन्हें थाने से कभी नहीं हटा सकते, जब तक भोपाल वाले मोहन जी का उन पर आशीष हैं, बाल भी बांंका नहीं होगा। नशे में वे भोपाल के मुखिया मोहन जी और विभाग के मुखिया के बारे में जिस तरह टल्ली होकर बोल रहे थे। यह नजारा पार्टी करने गए दूसरे लोगों ने भी करीब से सुना तो हक्के-बक्के रह गए। देखने लायक यह होगा कि मोहन जी और अपने साहब के बारे में अनाप-शनाप बोलने वाले थानेदार पर क्या कार्रवाई होती है या हमेशा की तरह अभयदान मिलेगा। बताते चले कि पिछले दिनों इन्हीं साहब की गाड़ी को हाइवे पर एक कंटेनर ने ठोंका था।

दो-दो हाथ करने के मूड में साहब

जिले के पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का पिछले दिनों तबादला हुआ। यह बात उन्हें हजम नहीं हुई। कहा जा रहा है कि साहब का चार माह बाद रिटायरमेंट है। ऐसे में उनका तबादला कर दिया गया तो वे आग बबूला हो उठे। वे रिटायरमेंट को आधार बनाकर अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट जा पहुंचे। संभावना है कि उन्हें स्टे मिल जाए। यदि ऐसा होता है तो वे सीधे तौर पर शासन से पंगा लेंगे। हालांकि रिटायरमेंट निकट होने के कारण वे पंगा लेने से भी नहीं चूक रहे। स्टे लाने के पीछे उनकी मंशा स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन शासन ने संबंधित क्षेत्र में उनके स्थान पर एक डायरेक्ट आफिसर को पदस्थ भी कर दिया। कहा जा रहा है कि साहब का एक नदी के उद्गम स्थल का प्रेम अक्सर जुबान पर आ जाता है, इसलिए वे यहां से आसानी से जाने के मूड में नहीं है।

साहब के कड़े रूख पर नजरे टेढ़ी

प्रशासनिक महकमे में पिछले माह ही आमद देने वाले एक प्रशासनिक अधिकारी की आमद देने के बाद उनकी कार्यप्रणाली से अमले में खासा हड़कंप मचा हुआ है। बैठकों में जिस तरह वे फालोअप कर पुराने रिकार्डों पर अधिकारियों को तलब कर रहे हैं। इससे उनकी पकड़ और कामकाज की आम लोग तारीफ कर रहे हैं, लेकिन पिछले दिनों साहब ने अधीनस्थ स्टाफ की एक साथ एक माह की वेतनवृद्धि रोक दी तो नाराजगी बढ़ गई। चर्चा है कि ईमानदारी से काम करने वाले कुछ अधिकारियों ने वेतनवृद्धि रोकने पर खुलेआम तो नहीं, लेकिन दबी जुबान से सवाल उठाएं। हालांकि यह बात अभी तक साहब तक नहीं पहुंची है कि किसने यह हिमाकत की, लेकिन इन साहब के करीबी बड़े साहब तक यह बात पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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