Politics: राजनीतिक हलचल: राज्यसभा चुनाव को लेकर कहीं ख़ुशी, कहीं गम के हालात….. एक नेत्री की वापसी तो अब दूसरी आखिर क्यों रूठी??? कौनसे नेताजी है, जिन्हें पद मिला तो रौनक लौटी और विरोधियों के भी कान हो गए खड़े???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…….

परिणाम को लेकर कहीं खुशी कहीं गम
पिछले दिनों हाई प्रोफाइल राज्यसभा चुनाव सीट को लेकर जिले की राजनीति भी गरमाई रही। इस सीट का भले ही जिले से कोई कनेक्शन नहीं हो, लेकिन जिस तरह कांगे्रस प्रत्याशी का नामांकन खारिज हुआ, इसमें विरोध स्वरूप जिले के नेताओं ने भी अपना योगदान दिया।
अब चर्चा है कि जिस तरह पार्टी के नेता विरोध जताकर सत्ता पक्ष को घेरने का प्रयास कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर पार्टी और सत्ता पक्ष के लोग इस मामले को लेकर तरह-तरह के कटाक्ष कर रहे हैं।
जिस तरह की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर आ रही है, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जीत-हार के समीकरण से सभी की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा जुड़ी है। चर्चा यह भी है कि यदि प्रत्याशी की जीत होती तो जिले की राजनीति के समीकरण बदल जाते। इसी वजह कटाक्ष कर सोशल मीडिया पर पार्टी की हार के बाद अंदर ही अंदर खुशी का माहौल बताने के प्रयास किए जा रहे हैं।
एक घर वापसी, दूसरी रूठी!
जिले की एक निकाय में इन दिनों सियासी हलचल चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल ही में निकाय की वर्तमान अध्यक्ष ने प्रदेश के मुखिया की मौजूदगी में अपनी घर वापसी कर राजनीतिक पारी को नया मोड़ दे दिया। इसके बाद से उनकी सक्रियता अचानक बढ़ गई है और वे लगातार कार्यक्रमों में नजर आ रही हैं।
इधर कभी उसी निकाय की राजनीति का केंद्र रहीं पूर्व अध्यक्ष की खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है। घर वापसी के बाद हुए आयोजनों और बैठकों में उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी तेज कर दी है। लोग इसे महज संयोग नहीं, बल्कि नाराजगी का संकेत मान रहे हैं। अब देखना यह है कि यह खामोशी जल्द टूटती है या फिर सियासी दूरी और बढ़ती है। आखिर राजनीति में रूठना भी खबर बन जाता है और मन जाना भी।
पद मिला तो लौट आई रौनक!
सियासत में वक्त कब करवट बदल ले, कोई नहीं जानता। जिले के एक नेताजी इसका ताजा उदाहरण बने हुए हैं। लंबे समय से राजनीतिक वनवास झेल रहे नेताजी को हाल ही में मंत्री दर्जे का एक अहम पद मिला क्या, उनकी सक्रियता देखते ही बन रही है। अब वे अपनी विधानसभा के लगभग हर कार्यक्रम में मौजूद दिखाई दे रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी खूब चमक रहे हैं।
नेताजी की इस अचानक बढ़ी सक्रियता ने पार्टी के दूसरे टिकट दावेदारों की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पद तो अभी मिला है, लेकिन नजरें अगली चुनावी पारी पर टिकी हैं। आखिर सियासत में पद सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, कई संकेत भी देता है।
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