Betul News: पंचायत स्तर पर वित्तीय गड़बड़ियों को मिल रहा संरक्षण निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी मौन

जमन्या पंचायत में विकास के नाम पर खेल! निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता के आरोप, जांच की मांग
Betul News: बैतूल। विकासखंड भीमपुर की ग्राम पंचायत जमन्या एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पंचायत में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच की मांग की है। आरोप है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय अनियमितताओं का खेल जमकर चल रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे बैठे हैं।
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए शिकायत पत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायत में नियमित रूप से ग्राम सभाएं आयोजित नहीं की जातीं और न ही ग्रामीणों को निर्माण कार्यों की जानकारी दी जाती है। आरोप है कि बिना ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कराए ही निर्माण कार्य स्वीकृत कर दिए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायत के अनुसार गंगाजी ढाना में निर्माणाधीन पुलिया का कार्य बेहद घटिया गुणवत्ता से किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण में रेत का उपयोग नहीं किया जा रहा, बल्कि डस्ट मिलाकर निर्माण कराया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती और टिकाऊपन पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

शौचालय पड़ा अधूरा,गार्डन के मानक भी ताक पर
मनमानी की हद यहीं खत्म नहीं हुई , ग्रामीणों का आरोप है कि, स्कूल परिसर में बनाए जा रहे गार्डन के निर्माण में भी गुणवत्ता मानकों की अनदेखी किए जाने की बात सामने आई है। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। ग्राम भादूगांव में वर्षों पहले स्वीकृत बालिका शौचालय का निर्माण आज तक पूरा नहीं हो पाया है।
इससे यह सवाल उठ रहा है कि स्वीकृत राशि का उपयोग आखिर कहां हुआ और अधूरे पड़े कार्यों के लिए जिम्मेदार कौन है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में निर्माण कार्यों को तोड़-मरोड़कर सुविधाओं का दोहन किया जा रहा है। सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद धरातल पर गुणवत्तापूर्ण कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं।
आरोप है कि पंचायत स्तर पर वित्तीय गड़बड़ियों को संरक्षण मिल रहा है और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी मौके पर जाकर जांच तक नहीं कर रहे।ग्रामीणों ने कलेक्टर एवं जिला पंचायत प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत जमन्या में हुए सभी निर्माण कार्यों की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो तथा निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार पूरे कराए जाएं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है।




