Betul News: 26 मछुआरों ने संभाली कमान, माचना नदी से हटेगी जलकुंभी की हरी आफत

विधायक हेमंत खंडेलवाल के मार्गदर्शन में नपा का विशेष अभियान युद्ध स्तर पर जारी
Betul News: बैतूल। शहर की जीवनदायिनी माचना नदी को जलकुंभी से मुक्त कराने के लिए नगर पालिका परिषद बैतूल ने अब नया और व्यवहारिक रास्ता अपनाया है। नदी में फैली जलकुंभी हटाने के लिए 26 अनुभवी मछुआरों की टीम को मैदान में उतार दिया है, जो लगातार नदी में उतरकर जलकुंभी सहित नदी की सफाई के लिए अभियान चला रही है।
कम खर्च में अधिक प्रभाव वाले इस अभियान को शहर में सराहना मिल रही है बल्कि, जलीय जीव जंतुओं को भी नया जीवन दान मिल रहा है ताकी वे स्वछंद रूप से पानी मे विचरण कर पर्यावरण को सहेज सकें।

विधायक हेमन्त खण्डेलवाल के निर्देशों पर अमल
नगर पालिका का यह विशेष अभियान विधायक हेमंत खंडेलवाल के मार्गदर्शन एवं निगरानी में युद्धस्तर पर संचालित किया जा रहा है। विधायक ने लंबे समय से विकराल बनी इस पर्यावरणीय समस्या को गंभीरता से लेते हुए नगर पालिका प्रशासन को त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
वर्षों से बढ़ रही थी जलकुंभी, प्रभावित हो रहा था नदी का अस्तित्व
माचना नदी में बीते कई वर्षों से जलकुंभी का अत्यधिक विस्तार हो गया था। हालत यह हो गई थी कि नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होने लगा था। जल प्रदूषण, दुर्गंध और गंदगी के कारण आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इतना ही नहीं, नदी में रहने वाले जलीय जीव-जंतुओं और मछलियों के अस्तित्व पर भी संकट गहराने लगा था।
कई स्थानों पर जलकुंभी की मोटी परत बनने से नदी की सतह पूरी तरह ढंक गई थी। माचना नदी को बचाने के लिए शहर के समाजसेवी, पर्यावरण प्रेमी और सामाजिक संगठन खास तौर पर ग्रीन टाइगर संस्था लगातार सक्रिय रहे और समय-समय पर श्रमदान और जागरूकता अभियान चलाकर जलकुंभी हटाने का प्रयास किया। हालांकि जलकुंभी के अत्यधिक फैलने से इसका निस्तारण करने में अनेकों समस्याएं सामने आ रही थी जिसे गम्भीरता से लेना पड़ा।
केमिकल इस्तेमाल से किया इंकार, जलीय जीवों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता
नगर पालिका परिषद सीएमओ नवनीत पांडेय बताया कि जलकुंभी हटाने के लिए विशेषज्ञों और तकनीकी जानकारों से भी चर्चा की। इस दौरान रासायनिक उपायों पर विचार किया गया, लेकिन विधायक हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नदी के पर्यावरण और जलीय जीवों की सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों ने भी आशंका जताई थी कि केमिकल के उपयोग से नदी के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और मछलियों समेत अन्य जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसी कारण पर्यावरण हित में रासायनिक उपायों को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया गया। नगर पालिका परिषद बैतूल द्वारा शहर के गंदे नालों का पानी सीधे नदी में जाने से रोकने के लिए सीवरेज प्रोजेक्ट भी तैयार किया गया है।
इस महत्वाकांक्षी योजना के माध्यम से भविष्य में माचना नदी को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने की दिशा में स्थायी समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि परियोजना को पूर्ण होने में समय लगेगा, लेकिन फिलहाल तत्काल राहत के तौर पर सफाई अभियान तेजी से चलाया जा रहा है।
26 मछुआरे उतरे नदी में, रोज निकल रही बड़ी मात्रा में जलकुंभी
सीएमओ नवनीत पांडे ने इस पूरे अभियान को व्यक्तिगत रूप से गंभीरता से लेते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार कराई है। उनके नेतृत्व में 26 अनुभवी मछुआरों की टीम प्रतिदिन लगातार नदी में उतरकर जलकुंभी हटाने का कार्य कर रही है। प्रतिदिन बड़ी मात्रा में जलकुंभी को नदी से बाहर निकाला जा रहा है।
अभियान की नियमित मॉनिटरिंग भी की जा रही है ताकि कार्य में तेजी बनी रहे इस अभियान में सहायक यंत्री नीरज धुर्वे, उपयंत्री राहुल शर्मा, ग्रीन टाइगर के तरुण वैद्य सहित नगर पालिका के कर्मचारी लगातार सक्रिय सहयोग कर रहे हैं।
पूरा नगर पालिका अमला अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ जुटा हुआ है। नगर पालिका परिषद ने विश्वास जताया है कि विधायक हेमंत खंडेलवाल के मार्गदर्शन, प्रशासनिक प्रयासों और जनसहयोग से जल्द ही माचना नदी को जलकुंभी मुक्त और स्वच्छ बनाया जा सकेगा।
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