Betul Samachar: नौ दिन चले अढ़ाई कोस : बैतूल में व्हाइट टॉपिंग का काम बना मज़ाक
Betul News: 9 days to cover 2.5 kos: White topping work in Betul becomes a joke

पहले खोदी सड़क, फिर खोदे गड्ढे , न योजना न प्रगति, सब कुछ बेतरतीब
Betul Samachar: बैतूल।शहर के सदर क्षेत्र से लेकर कोतवाली थाने तक बनाई जा रही 3.07 करोड़ की व्हाइट टॉपिंग सड़क का काम नौ दिन चले अढ़ाई कोस की कहावत को चरितार्थ कर रहा है। 9 जून को भूमिपूजन के बाद पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन काम की रफ्तार कछुआ चाल से भी धीमी है। फिलहाल कोतवाली से लेकर जेल तक पूरी सड़क खोद दी गई है, पर आगे कोई ठोस निर्माण कार्य होता नजर नहीं आ रहा। रात के अंधेरे में एक-दो घंटे जेसीबी और कटर मशीन चलाकर औपचारिकता निभाई जा रही है। इससे हालात यह हो गए हैं कि सड़क पर धूल का गुबार उठ रहा है,गिट्टियों पर वाहन फिसलकर दुर्घटनाएं अलग हो रही हैं, व्यापारी और रहवासी परेशान हैं।
रात में हो रहा काम का ड्रामा, नतीजा शून्य
जैसे ही विधायक हेमन्त खण्डेलवाल और केंद्रीय मंत्री डी डी उइके ने सड़क का भूमिपूजन किया इस क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों में खुशी व्याप्त थी, लेकिन पिछले पांच दिनों में सड़क निर्माण भगवान भरोसे चलाया जा रहा है। जो अब जनता के लिए ही मुसीबत बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार रात में काम का ड्रामा कर रहा है ताकि यातायात बाधित न हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रगति शून्य है। रात में कब आकर थोड़ा बहुत काम कर कर्मचारी रफ्फूचक्कर हो जाते हैं पता ही नहीं लगता। कोतवाली से जेल तक सड़क की ऊपरी सतह उखाड़ कर छोड़ दी गई है। कहीं कहीं किनारे पर खुदाई की गई है।
खुदाई के बाद सड़क पर पड़ी गिट्टियां उछलकर लोगों को चोटिल कर रही रही हैं। तो पल पल दो पहिया वाहन स्लीप हो रहे हैं। मुख्य सड़क होने से रोजाना सैकड़ो की संख्या में वाहन गुजरते हैं, वाहनो से उड़ रही धूल लोगों के घरों और दुकानों में घुस रही है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल असर हो रहा है।नागरिको का कहना है कि,महज मशीन घुमा देने से सड़क नहीं बनती, खासकर तब, जब जनता को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा हो। काम की धीमी रफ्तार अब आक्रोश में बदलती दिख रही है।
ठेकेदार पर प्रशासन की पकड़ ढीली है?
अगर लाखों की लागत से यह परियोजना मंजूर हुई है, तो गुणवत्ता और समय सीमा की निगरानी कौन कर रहा है? यह बड़ा सवाल है। जन सेवक जनता के लिए काम कर रहे या ठेजेदार के लिए यह विश्लेषण का विषय है। आखिर विभाग दैनिक प्रगति की रिपोर्टिंग करने से क्यों कतरा रहा है ?सड़क को खोदकर छोड़ देना क्या जनहित में सही है? विकास के नाम पर धूल, धक्के और हादसों का सामना करना क्या जनता के लिए ठीक है। कुल मिलाकर जहाँ ये सड़क नागरिकों के लिए राहत और विकास का रास्ता बन सकती थी, वहीं बेतरतीब कार्यप्रणाली ने इसे परेशानी और खतरे का कारण बना दिया है। व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है, और स्थानीय लोग अब प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं।
इनका कहना….
मशीन खराब होने से काम रोकना पड़ा था, एक दो दिन में रफ्तार से काम शुरू करवाया जाएगा।
डी एस परमार, एसडीओ पीडब्ल्यूडी बैतूल।




