Betul News: कॉलोनाइजर ने प्लाटिंग काटी, बेचने की तैयारी के पहले उल्टा पड़ा दाव
टीएनसीपी की अनुमति न लेने के पीछे दिए जा रहे तर्क गलत, होगी कड़ी कार्रवाई

Betul News: बैतूल। शहर के लोहिया वार्ड माचना नगर में नदी किनारे तथाकथित दो कालोनाइजरों ने नियम और कायदों को ताक पर रखकर कालोनी के नाम प्लाटिंग काट ली। इसके लिए न तो टीएनसीपी और न ही नगरपालिका से विधिवत अनुमति लेना उचित समझा।
जब मामला सांझवीर टाईम्स के माध्यम से अधिकारियों के संज्ञान में आया तो नोटिस पर नोटिस दिए जाने का खेल शुरू हो गया। इसे कालोनाइजर हल्के में ले रहे हैं, उनका तर्क है कि सौ वर्ष पुराने दस्तावेजों के आधार पर नियम से काम कर रहे हैं, लेकिन जानकार बताते हैं कि नए नियमों के मुताबिक वर्ष 2021 के आधार पर जमीन की नामजोख कर प्लाटिंग काटना। पूरे मामले में कालोनाइजर के साथ अधिकारी भी उलझते जा रहे हैं।

लोहिया वार्ड की माचना नदी के पास बीते कुछ माह से जिस तरह शासकीय संपत्ति का दोहन हुआ है, इसके लिए नपा के अधिकारी जिम्मेदार कहे जा सकते हैं। इसके लिए कुछ जिम्मेदारी राजस्व विभाग की भी है, लेकिन दोनों विभाग में तालमेल न होने का फायदा सीधे तौर पर कालोनाइजर ने उठाया है और माचना नदी के किनारे अपनी जमीन पर नियम के विरूद्ध कब्जा कर शासकीय संपत्ति के वारे-न्यारे कर दिए।
सांझवीर टाईम्स में शासकीय संपत्ति के कब्जे को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने नपा के माध्यम से दो नोटिस कालोनाइजर अब्दुल हक और रंगा पवार को थमाए हैं, लेकिन अब तक उनका जवाब नहीं मिला है। अधिकारियों का दावा है कि नियत तिथि में जवाब न मिलने पर सीधे शासकीय संपत्ति पर किया गया अतिक्रमण बिना सूचना के हटा दिया जाएगा।

नियमों को धत्ता बताकर की प्लाटिंग
सूत्र बताते हैं कि कालोनाइजरों ने तर्क दिया था कि उन्होंने नियमों से सारे काम किए हैं। केवल अपने उपयोग के लिए जमीन खरीदी है, लेकिन उनका यह दावा उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। दरअसल माचना नगर में नदी किनारे दोनों कालोनाइजर रंगा पवार और अब्दुल हक ने नपा के नोटिस के पहले ही प्लाटिंग कर बेचने की तैयारी कर ली थी। जैसे ही मामले में खबरें प्रकाशित हुई तो कालोनाइजरों ने प्लाटों की बिक्री बंद कर दी।
हालांकि चर्चा यह है कि दोनों कालोनाइजरों ने प्लाटिंग काटने के बाद किसी को बेचे नहीं। शासकीय जानकार बताते हैं कि जब जमीन अपने उपयोग के लिए खरीदी गई तो प्लाटिंग नहीं काटी जा सकती। यदि प्लाटिंग काटी है तो इसका साफ मतलब है कि बेचने के लिए उपयोग किया जाएगा। ऐसे में नियम से कालोनाइजरों को सबसे पहले टीएनसीपी की अनुमति लेना था, लेकिन आज की तिथि में दोनों कालोनाइजरों के पास टीएनसीपी की अनुमति नहीं है।
मामला उलझा, बड़ी कार्रवाई के संकेत
टीएनसीपी की अनुमति लिए बिना प्लाटिंग काटने और नगरपालिका के अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण शासकीय संपत्ति का कालोनाइजरों ने बेजा दोहन कर डाला। सांझवीर टाईम्स मेें खबरें प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मचा और अपने स्तर पर जांच चल रही है।
राजस्व की टीम ने एसडीएम के निर्देश पर सीमांकन किया है तो नपा ने दोनों कालोनाइजरों को 17 और 28 अप्रैल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जानकार सूत्र बताते हैं कि यदि कालोनाइजर ने सही समय पर जवाब नहीं दिया तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यह भी हो सकता है कि बिना अनुमति लिए कालोनी काटने पर प्रशासन नपा की अनुशंसा पर इसे प्रबंधन में ले ले।
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