Betul Samachar: खौफ: लाठी के साए में विद्यार्थियों का भविष्य!

Betul News: Fear: Students' future under the shadow of sticks!

बंदरों के आतंक से रानीपुर बना वानरपुर, बच्चों के हाथों में किताब के बजाए डंडा

Betul Samachar: प्रकाश सराठे/ रानीपुर। कहते हैं बच्चे देश का भविष्य होते हैं और उनके हाथों में किताब-कलम ही शोभा देती है, लेकिन रानीपुर के वर्तमान हालात इस कहावत को सिरे से नकार रहे हैं। यहां स्कूली बच्चों के हाथों में अब किताबों के बस्ते से ज्यादा लाठियां दिखाई दे रही हैं। नौनिहालों को स्कूल जाते समय अपनी सुरक्षा के लिए लाठियां भी ले जाना पड़ रहा है।

पिछले कुछ महीनों से रानीपुर में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि ग्रामीणों ने मजाक-मजाक में ही गांव को वानरपुर कहना शुरू कर दिया है। बंदरों के झुंड ने गलियों, छतों और आंगनों पर अपना कब्जा जमा लिया है। दिन हो या रात, हर समय हमले का डर बना रहता है। दहशत के कारण लोग अपने ही घरों में कैद होकर रहने को मजबूर हैं, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

छतों और आंगनों में भी सुरक्षित नहीं लोग

ग्रामीणों का कहना है कि बंदर अब सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सीधे लोगों पर हमला करने लगे हैं। महिलाओं का आंगन में निकलना मुश्किल हो गया है। छतों पर कपड़े सुखाने या अनाज रखने जाने के लिए पुरुषों को हाथ में डंडा लेकर पहरा देना पड़ता है। दहशत का आलम यह है कि घरों के दरवाजे-खिड़कियां दिन-रात बंद रखनी पड़ रही हैं।

शिक्षा पर मंडराता संकट

सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले कई बच्चे डर के कारण स्कूल जाने से कतराने लगे हैं। अभिभावकों को हर समय यह चिंता सताती रहती है कि कहीं बंदर बच्चों को नुकसान न पहुँचा दें। मजबूरी में कई माता-पिता खुद बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते हैं, जबकि अकेले जाने वाले बच्चों के हाथ में डंडा होना अब आम बात हो गई है।

प्रशासन और वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि बंदरों के इस बढ़ते आतंक की शिकायतें कई बार प्रशासन और वन विभाग से की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न तो बंदरों को पकड़ने की व्यवस्था की गई और न ही उन्हें जंगल में छोड़ने के प्रयास हुए। वन विभाग की चुप्पी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बंदरों के आतंक से निजात नहीं दिलाई गई तो वे तहसील मुख्यालय का घेराव कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि अब सब्र का बांध टूटने लगा है और प्रशासन को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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