Betul News: जिले की 566 पंचायत और 11 तहसीलों में लगेंगे विंड सिस्टम

किसानों को मौसम संबंधित मिलेगी त्वरित जानकारी
Betul News: बैतूल। जिले में अब खेती किसानी और प्राकृतिक आपदा की निगरानी के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। आपदा संबंधित निगरानी पूरी तरह से डिजीटल होने जा रही है। जिले के तहसील और ग्राम पंचायत स्तर पर ऑटोमैटिक रेनगेज और तहसील में आटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। खास बात यह है कि मौसम संबंधित जानकारी त्वरित मिल जाएंगी। इस संबंध में कृषि विभाग द्वारा निविदा जारी की है और आवेदन मांगे है।
इस नई तकनीकि से पल-पल मौसम की जानकारी किसानों को उपलब्ध हो सकेंगी। अभी केवल जिला मुख्यालय पर मौसम संबंधित जानकारी दी जाती है, अब यह तहसील और पंचायत स्तर पर मिलना शुरू हो जाएंगी। बैतूल जिले की 566 पंचायत और 11 तहसीलों में विंड सिस्टम लगाया जाएंगा। इसकी जरूरत इसीलिए पड़ी की मौसम संबंधित जानकारी केवल जिला स्तर पर मिलती है।
कई बार जिले के कुछ हिस्ससों में भारी वर्षा हो जाती है और इसकी सटिक जानकारी नहीं मिलती। स्थानीय स्तर पर होने वाली प्राकृतिक घटनाओं का सटिक आकनल जिसमें बारिश, अतिवृष्टि, तेज हवाएं आदि संबंधित जानकारी मिलेगी।
पंचायत स्तर पर वेदर संबंधित सयंत्र लगने से मौसम संबंध्ति जानकारी की समस्य खत्म हो जाएंगी और किसानों को सटिक जानकारी मिलेगी जिससे किसानों को नुकसान भी कम होगा और नुकसान होने की स्थिति में किसानों को वास्तविक मुआवजा भी मिलेगा।
इस तरह से काम करेगा वेदर सिस्टम
यह पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक रहेगा और शौर ऊर्जा से संचालित होगा। पंचायतों में लगने वाले रेन गेज और तहसीलों में लगने वाले वेदर स्टेशनों में आधूनिक सेंसर और सीम कार्ड आधारित टेलीमेट्री सिस्टम लगा होगा। यह उपकरण 15 मिनट के अंतराल पर बारिश, हवा की गति, तापमान, वातावरण में नमी की जानकारी वायरलेस तकनीकि के माध्यम से सीधी जानकारी विंड्स के केन्द्रीय सर्वर को भेंजी जाएंगी। इसमें मानवीय हत्सक्षेप की आवश्यकता नहीं रहेंगी।
किसान और आम नागरिकों को मिलेगा फायदा
इस सिस्टम से कृषि विभाग को आपदा प्रबंधन और खेती की बेहतर रणनीति बनाने में मद्द मिलेंगी। किसानों को इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा की गांव क्षेत्र में मौसम की सटिक जानकारी मिलेगी इस हिसाब से फसल की बोवनी और कटाई संबंधित काम मौसम के आधार पर कर सकेंगे।
मौसम खराब होने, ओलावृष्टि होने, आकाशीय बिजली गिरने की संभावनाएं और जानकारी भी किसानों को सटिक मिल पाएंगी। जानकारी मिली है कि यह सभी सिस्टम 6 से 9 महीनों के भीतर सभी तहसील और पंचायतों में लगने की संभावना है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग के एसडीओ रामवीर सिंह राजपूत से चर्चा करनी चाही, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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