Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: आखिर लिफाफा कनेक्शन की फुसफुसाहट कैसे तेज हो गई?? प्रशिक्षु अधिकारी के सारथी का यह कैसा ड्रामा??? साहब जाएंगे या रुकेंगे? तेवर में नरमी से अचानक बढ़ी सरगर्मियां…… विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

लिफाफा कनेक्शन की फुसफुसाहट तेज
मुलताई अनुविभाग के एक आरक्षित विधानसभा क्षेत्र के थाना मुख्यालय में लिफाफा कनेक्शन की फुसफुसाहट अचानक तेज हो गई है। चर्चा है कि यहां के थानेदार ने 4-5 दिन पहले एक साहब को बड़ा लिफाफा चढ़ा दिया। बस फिर क्या था, इसके बाद थानेदार के तेवर ही बदल गए। पूरे क्षेत्र में अब सट्टा और जुआं कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं।
चर्चा चल रही है कि लिफाफे के बदले थानेदार ने पूरे क्षेत्र में अवैध कारोबारियों को खुली छूट दे दी है। हालांकि जुआं-सट्टा किन क्षेत्रों में शुरू हुआ है। इसकी जानकारी सामने नहीं आई है , लेकिन धुंआ उठ रहा है तो चिंगारी भी सुलग रही है का किस्सा यहां सटीक बैठ रहा है। अब देखना यह है कि नजराना पेश कर थानेदार और कितने दिन अवैध कारोबारियों को संरक्षण देते हैं।
सारथी का फुल ड्रामा
खाकी वाले विभाग में इन दिनों एक सारथी की प्रेम कथा खूब सुनी जा रही है। यह जनाब एक प्रशिक्षू अधिकारी का मुख्यालय पर पदस्थापना के दौरान सारथी रहा है। पिछले दिनों बदलाव में प्रशिक्षु अधिकारी को मुख्यालय से करीब पचास किमी दूर एक थाने में पदस्थ किया गया तो प्रशिक्षु अधिकारी सारथी को ले जाना नहीं भूले। अभी कुछ दिनों पहले ही प्रशिक्षु अधिकारी को मुख्यालय के एक थाने मेें जवाबदेही सौंपी गई है।
पहले तो प्रशिक्षु अधिकारी ने अपने सारथी को 50 किमी दूर से यहां लाने के लिए बड़े साहब से मन्नतें की, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। चर्चा है कि इसके बाद सारथी खुद ही बड़े साहब के पास खड़े होकर खुद ही मनुहार लगाने लगा। यहां उल्टा हो गया और उसे लंबी छुट्टी पर भेज दिया। सारथी छुट्टी के बजाए मुख्यालय पर ही प्रशिक्षु अधिकारी के ईद-गिर्द घूमते देखा जा रहा है। महकमे में चर्चा है कि यह मामला ड्यूटी से ज्यादा डेडिकेशन का है और वह भी खास दिशा में है। अब देखना यह है कि सारथी की गाड़ी फिर कब, कहां और किसके इशारे पर स्टार्ट होती है।
क्या होगा साहब की कुर्सी?
जिले में इन दिनों प्रशासनिक महकमे के एक बड़े मुखिया के तबादले को लेकर सभी लोग कन्फूजन में है। वैसे साहब खुद यहां पर रहना नहीं चाहते हैं, यह बात भी सार्वजनिक है, लेकिन पिछले दिनों उन्होंने जिस तरह अधिकारियों की प्रति सप्ताह ली जाने वाली बैठक में तीन घंटे की मैराथन पारी खेली तो सुगबुगाहट तेज हो गई। दबी जुबान से अधिकारी कह रहे हैं कि जिन्हें जिले से जाना होता है वे बैठकों में इस तरह की चर्चा नहीं करते हैं।
इससे संकेत है कि फिलहाल साहब की कुर्सी को खतरा नहीं है। दूसरी तरफ तबादला सूची को लेकर भी प्रशासनिक अमले में सुगबुगाहट चल रही है। एक सप्ताह बाद आने वाली सूची में साहब का नाम पहले पायदान पर आने की खबर के बीच प्रशासनिक गलियारों में स्वमेव चर्चा तेज हो गई है। इन अटकलों पर सूची आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।




