Betul Mandi News: चार दिन की छुट्टी के बाद मंडी में एक दिन खरीदी, फिर बिगड़े हालात

मंडी शेड पर व्यापारियों का कब्जा, किसान धूप में उपज डालने को मजबूर
Betul Mandi News: बैतूल। कृषि उपज मंडी की व्यवस्थाएं सुधारने के दावे एक बार फिर खोखले साबित हुए हैं। चार दिन की छुट्टियों के बाद सोमवार को जैसे ही खरीदी शुरू हुई, मंडी की अव्यवस्था फिर उजागर हो गई। मंगलवार को हालात इतने खराब हो गए कि किसानों को अपनी उपज रखने के लिए मंडी शेड में जगह तक नहीं मिली और उन्हें तेज धूप में बाहर ही फसल डालने को मजबूर होना पड़ा।
मंडी परिसर में व्यापारियों द्वारा खरीदे गए अनाज के बोरे शेड के अंदर ही पड़े रहे, जिससे किसानों के लिए निर्धारित स्थान पूरी तरह घिरा रहा। किसान सुबह से अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचे, लेकिन शेड खाली नहीं होने के कारण उन्हें खुले आसमान के नीचे इंतजार करना पड़ा। तेज धूप और गर्मी के बीच किसान अपनी फसल की निगरानी करते हुए घंटों खड़े रहे, जिससे उनमें भारी नाराजगी देखने को मिली।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मंडी की बिगड़ती व्यवस्था को लेकर किसानों ने धरना प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने जल्दबाजी में किसानों, व्यापारियों और अधिकारियों की बैठक बुलाकर व्यवस्थाएं सुधारने का भरोसा दिलाया था। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि छुट्टियों के दौरान व्यापारियों के बोरे शेड से हटाए जाएंगे और किसानों को प्राथमिकता के साथ सुविधा दी जाएगी। लेकिन छुट्टियां खत्म होते ही सारे आश्वासन हवा साबित हो गए और जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नजर नहीं आया।
मंगलवार सुबह स्थिति और भी अव्यवस्थित हो गई जब कई किसानों को मंडी परिसर में प्रवेश तक नहीं दिया गया। मंडी के मुख्य गेट से लेकर सड़क तक उपज से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन लंबी कतार में खड़े रहे। मंडी प्रशासन द्वारा सुबह 10 बजे तक ही उपज लाने की समय सीमा तय की गई है, जिसके बाद वाहनों की एंट्री रोक दी जाती है। किसानों का कहना है कि रास्ते में वाहन खराब हो जाना, पंचर होना या अन्य तकनीकी कारणों से देरी हो जाना आम बात है, लेकिन प्रशासन इन परिस्थितियों को समझने के बजाय सीधे प्रवेश से मना कर देता है।
किसानों के अनुसार, देर से पहुंचने पर उन्हें पूरी रात बाहर इंतजार करना पड़ता है और अगले दिन खरीदी शुरू होने तक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इससे समय, श्रम और आर्थिक नुकसान अलग से झेलना पड़ता है। किसानों का आरोप है कि मंडी प्रशासन व्यापारियों के दबाव में काम कर रहा है और किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
मंडी की लगातार बिगड़ती व्यवस्थाओं ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही शेड खाली कराकर पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं की गई, तो आंदोलन फिर तेज किया जाएगा। मंडी, जो किसानों की सुविधा के लिए बनाई गई थी, अब उनके लिए परेशानी का केंद्र बनती जा रही है। इस संबंध में मंडी सचिव सुरेश परते से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।




