Prashasnik Kona : प्रशाननिक कोना: किस थानेदार के गले की हड्डी बने 2 पेटी??? आखिर क्या हुआ जो राजस्व वाले साहब नियमों में उलझ गए??? गुपचुप कबाड़ बेचने पर आखिर अस्पताल के अधिकारियों के बीच क्या खिचड़ी पकी????? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशाननिक कोना में……
Prashasnik Kona: Prashasnik Kona: Which police officer's neck got stuck in these 2 boxes???

थानेदार के गले पड़े दो पेटी
एक आरक्षित विधानसभा के चर्चित थानेदार ने रेत के आरोपी पर सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने तक दो पेटी की तोड़ी कर डाली। इस मामले की जानकारी जैसे ही वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, उन्होंने आनन-फानन में डीएसपी स्तर की महिला अधिकारी को जांच सौंप दी। इससे पहले महिला डीएसपी को मामले की डायरी मिलती, अगले ही दिन संबंधित को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई। थानेदार साहब की बांचे इसलिए खिल गई कि दो पेटी की तोड़ी हो गई और संबंधित की गिरफ्तारी के रोक के प्रयास ज्यादा दिन नहीं करना पड़ा और उसे जमानत मिल गई। हालांकि मामले की शिकायत के बाद जांच जरूर उनके पीछे पड़ी है। यह थानेदार जिस क्षेत्र से आते हैं, उस नगर को प्राचीन नदी के उपनाम से भी जाना जाता है।
नियमों में उलझे राजस्व वाले साहब
एक राजस्व वाले अधिकारी इन दिनों नियमों के हवाला देकर कई कार्रवाई को पेडिंग कर चुके हैं। जब से वे तहसील में दूसरी बार आए हैं, तब से कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इससे मामला सुलझने के बजाए उलझते जा रहा है। कई मामले ऐसे हैं, जो नाममात्र के हस्ताक्षर से सुलझ सकते हैं, लेकिन इसमें मिकमेन निकालकर राजस्व साले साहब जमकर पेंडेंसी बढ़ा रहे हैं। जब कोई नियम की बात करता है तो फिर कहते हैं कि मुझे क्यों उलझा रहे हैं। इसके बाद वे तर्क देते रहते हैं कि उन्हें फुर्सत नहीं मिलती, क्योंकि ने चार तहसील अकेल संभाल रहे हैं। हालांकि उनका तर्क भी सही कहा जा सकता है। वर्क लोड के कारण साहब थोड़े बदले-बदले से दिखाई दे रहे हैं।
गले की हड्डी बना कबाड़ बेचना
लोगों के स्वास्थ्य की करीब से नजर रखने वाले विभाग में इन दिनों कबाड़ कांड की चर्चा जोरों पर हो रही है। खबर है कि पुराने कबाड़ा को अस्पताल की दो जुगल जोड़ी ने बेच डाला। हालांकि दोनों ही चर्चित जिम्मेदार तर्क दे रहे हैं कि विधिवत कबाड़ा बेचा गया, लेकिन अस्पताल पर सूक्ष्म नजर रखने वालों का दांवा है कि जो कबाड़ा बेचा है, वह लाखों का नहीं बल्कि करोड़ों का है। यही पर अपने आप को ईमानदार कहने वाले जिम्मेदारों की बोलती बंद हो गई है। खबर है कि इस घपले की गुपचुप शिकायत स्थानीय विधायक और केंद्रीय मंत्री के अलावा विभाग के प्रमुख अधिकारी को की जा चुकी है। यदि जांच हुई तो मामले में बड़ी हेराफेरी से इंकार नहीं किया जा सकता है।




