Betul Ki Khabar: इंदौर की घटना के बाद जागी नपा, प्रत्येक वार्डों से पानी के सेंपलों की जांच

तीन वार्डों में शुद्ध मिला पानी, नपा के पास निजी आरओ की नहीं जानकारी
Betul Ki Khabar: बैतूल। इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत की खबर ने पूरे प्रदेश में चिंता पैदा कर दी है। इस घटना के बाद बैतूल नगर पालिका ने जागरूकता का परिचय देते हुए शहर के प्रत्येक वार्ड से पानी के सेंपल लेने और उनकी जांच कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नगर पालिका के अधिकारियों ने पिछले 2-3 दिनों में तीन वार्डों-विवेकानंद, शंकर और लोहिया वार्ड के पानी के सेंपल लिए और जांच कराए। इन तीनों वार्डों के पानी के सेंपल में शुद्धता पाई गई। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक वार्ड से लगभग 4 से 5 सेंपल लिए जा रहे हैं और सभी 33 वार्डों की जांच एक पखवाड़े के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
नगर पालिका ने यह भी बताया कि जहां से दूषित पानी की शिकायतें मिल रही हैं, वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अमला संबंधित वार्डों में पहुंचकर पानी की गुणवत्ता की स्थिति का पता लगा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। हालांकि, पानी की जांच में नगर पालिका की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। शहर में संचालित निजी आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) सेंटरों के बारे में नपा के पास कोई ठोस जानकारी नहीं है। अधिकारियों को यह भी पता नहीं कि जिले में कितने निजी आरओ सेंटर संचालित हो रहे हैं और उनके पानी की शुद्धता की जांच कब हुई थी।
निजी आरओ सेंटरों की जांच नहीं
नगर पालिका की एक गंभीर लापरवाही सामने आ रही है, नपा के पास में शहर में संचालित निजी आरओ सेंटरों की कोई जानकारी नहीं है। नपा के अधिकारियों को यह नहीं मालूम है कि जिला मुख्यालय पर कितने निजी आरओ सेंटर संचालित हो रहे है। इन निजी आरओ सेंटरों के पानी की जांच कई महीनों से नहीं हुई है। वाटर आरओ सेंटर संचालकों द्वारा जो प्रमाण पत्र नगर पालिका में जमा किया है। नपा के अधिकारी उसी प्रमाण पत्र को आधार बनाकर निजी आरओ सेंटरों से शुद्ध पानी मिलने का दावा कर रही है। जबकि निजी आरओ सेंटरों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए, ताकि पानी की शुद्धता की जांच हो सके। शहर में कई लोगों द्वारा निजी आरओ सेंटरों से पानी खरीदकर पिया जा रहा है, लेकिन उसकी शुद्धता कितनी है इसकी कोई जानकारी नहीं है।
प्रमाण पत्र को मान लिया सहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि निजी आरओ सेंटरों का समय-समय पर निरीक्षण बेहद जरूरी है। केवल संचालकों द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्रों पर भरोसा करना स्वास्थ्य के लिए खतरे का कारण बन सकता है। यदि नियमित जांच नहीं होती है, तो दूषित पानी से होने वाले रोगों का खतरा बना रहता है। नगर पालिका ने कहा है कि सभी वार्डों के सेंपल लेने और जांच कराने के बाद यदि कहीं दूषित पानी की आपूर्ति पाई जाती है, तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में नगर पालिका की सक्रियता को सराहा जा रहा है, लेकिन निजी आरओ सेंटरों की अनदेखी से शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा अभी भी बना हुआ है। इसीलिए विशेषज्ञ और नागरिक दोनों ही नियमित पानी जांच और निजी आरओ सेंटरों के निगरानी की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
इनका कहना…
सभी वार्डों से पानी के सेंपल लेकर जांच कर रहे है। तीन वार्डों के सेंपलों की रिपोर्ट आई है, जिसमें पानी शुद्ध मिला है। निजी आरओ सेंटरों की कोई जानकारी नहीं है, आरओ संचालकों द्वारा स्वयं ही शुद्धता प्रमाण पत्र दिया जाता है। नपा की तरफ से कोई जांच नहीं हुई है।
धीरेन्द्र राठौर, जल शाखा प्रभारी, नपा बैतूल




