एसआईआर का साइड इफैक्ट: तहसील कार्यालय में काम ठप
एसडीएम महीनों से नहीं दे रहे समय, तहसीलदार-नायब तहसीलदार का भी ठिकाना नहीं, दूर से आए लोग बैरंग लौट रहे

SIR Side Effects: बैतूल। एसआईआर का काम कागजों पर तो पूरा हो गया है, लेकिन इसमें शासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने का हवाला देकर बैतूल तहसील के अधिकारी कार्यालय में बैठने से हीला-हवाली कर रहे हैं। इसका सीधा असर दूर दराज से आए लोगों को अपने कामों के लिए एकमुश्त पैसा खर्च कर आना पड़ रहा है और बैरंग लौटना पड़ रहा है।
खुद एसडीएम औपचारिकता निभाने कभी-कभार कार्यालय आकर लौट जाते हैं। उनकी अनुपस्थिति में तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी समय नहीं दे पा रहे हैं। इसकी वजह डाक और प्रकरण की सुनवाई भी बंद हो चुकी है। इससे भी बड़ी परेशानी सामने आ रही है।
शासन ने निर्वाचन आयोग के निर्देश पर हर जिले में एसआईआर के लिए अधिकारियों की तैनाती की है। बैतूल जिले में कलेक्टर के मार्गदर्शन में एसआरआई के काम में बैतूल जिला प्रदेश में दूसरे स्थान पर आकर उपलब्धि भी हासिल कर चुका है। इसके बावजूद शासन ने एसआरआई का काम खत्म होने के बाद अधिकारियों के माध्यम से बीएलओ को उक्त कार्य में तैनात कर दिया है। परीक्षा के दौर में कई शिक्षकों की भी इस कार्य में ड्यूटी लगाने से अर्धवार्षिक परीक्षा समेेत अन्य शैक्षणिक कार्य भी प्रभावित हुए, लेकिन शासन के निर्देशों का पालन करते हुए अधिकारियों ने बीएलओ की दूसरी बार ड्यूटी लगा दी। इसका कई जगह विरोध भी हुआ है।
खुद बीएलओ बनाए गए शिक्षकों ने विद्यार्थियों का भविष्य देखते हुए उन्हें इस कार्य से मुक्त करने का हवाला भी दिया, लेकिन आदेश का हवाला देते अधिकारी पूरी तरह से इंकार कर रहे। एसआईआर के बहाने अब आम लोगों से जुड़े तहसील कार्यालय में भी काम पूरी तरह प्रभावित होने की जानकारी सामने आ रही है।
एसडीएम निभा रहे औपचाकिरता
सांझवीर की पड़ताल में सामने आया है कि पिछले डेढ़ माह में तहसील में कामकाज पूरी तरह से ठप हो गए हैं। एसआईआर के बाद हालात यह है कि जरूरत के कामकाज जमीन-जायजाद, स्थाई जाति प्रमाण पत्र और अन्य कामों के लिए जाने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं।
यहां पर भारी भरकम अमला मौजूद है, लेकिन खुद एसडीएम सप्ताह में कभी-कभार कार्यालय जाकर 15-20 मिनट में वापस लौट जा रहे हैं। कोई फाइल भी उनके द्वारा नहीं देखी जा रही है। इसी तरह तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी काम नहीं कर पा रहे हैं। यह बात खुद दूर दराज से आए ग्रामीण अंचलों के लोगों ने बताई। इसके बाद लोग घंटों अधिकारियों का इंतजार करते तहसील कार्यालय में बैठे रहते हैं।
कई लोग तो ऐसे हैं जो जेब से पैसा खर्च कर अपने काम के लिए तीन से चार बार यहां पर आ चुके हैं, लेकिन अधिकारियों के नहीं आने से आरआई और पटवारियों ने बाद में आने का हवाला देकर वापस लौटा दे रहे हैं। इसके अलावा भूमि संबंधित कई फाइले भी तहसील कार्यालय में एसडीएम के न बैठने से लंबित होने की जानकारी सामने आई है।
डाक और प्रकरण की सुनवाई भी बंद
बताया जाता है कि एसआईआर की वजह से डाक और प्रकरणों की सुनवाई भी कई दिनों से बंद है। चूंकि एसआईआर के मामले में लोगों को नोटिस देकर इसका निराकरण किया जा रहा है। यही वजह है कि हर दिन पेशी पर होने के कारण तहसील कार्यालय में डाक और प्रकरणों की सुनवाई नहीं हो पा रही है।
बताया जाता है कि 23 जनवरी तक एसआईआर के मामलों की पेशी होगी। इसके बाद 7 फरवरी को इसका अंतिम प्रकाशन किया जाना है। यही वजह है कि डाक और कई प्रकरणों की सुनवाई एसडीएम न्यायालय में 7 फरवरी के बाद ही हो पाएगी। इससे कई प्रकरणो की पेशियों की तारीख भी लगातार बढ़ते जा रही है।
इनका कहना..
एसआईआर को लेकर शासन के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। अभी पेशियों की तारीख पर लोग आ रहे हैं। 7 फरवरी तक यह काम चलेगा, इसलिए कार्यालय में समय नहीं दे पा रहे हैं।
अभिजीत सिंह, एसडीएम बैतूल




