Betul Election News: बड़ी चूक: सर्वे के बावजूद कैसे मृत हो गए 32 बुजुर्ग मतदाता
Betul Election News: Big mistake: How 32 elderly voters died despite survey

परिजनों से सहमति प्रमाण पत्र भरवाने के बाद मतदान होना था, प्रशासन की लापरवाही पर कई सवाल खड़े
Betul Election News: (बैतूल)। विधानसभा चुनावों में 80 वर्ष से अधिक और दिव्यांगजनों को घर पर ही मतदान कराए जाने के कार्य मे बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिन मतदाताओं ने इसके लिए अपनी सहमति प्रदान की थी। उन मतदाताओं में से 32 को मृत बता दिया गया है। सवाल यह उठ रहा है कि चंद दिनों के भीतर ही अचानक इतनी बड़ी संख्या में बुजुर्ग असहाय और दिव्यांग मतदाता अगर कैसे मृत हो गए। जानकारी यह भी मिली है कि कई मतदाता अपने घर इंतजार करते रहे पर कोई मतदान कराने के लिए उनके घर ही नहीं पहुंचा। वार्डों में कई मतदाता ऐसे भी है जो असहाय तो हैं, लेकिन सर्वे के दौरान इन मतदाताओं की सुध ही नहीं ली गई, लेकिन यह लापरवाही निर्वाचन आयोग की मंशा पर पानी फेर रही है।
पात्रों की संख्या 27 हजार, मात्र 1284 की ही सहमति पर सवाल
जानकारी के मुताबिक जिले की पांच विधान सभाओं में 80 साल की उम्र गुजार चुके बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं की संख्या लगभग 27 हजार 5 सौ 75 के आस पास बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन के मुताबिक जिन मतदाताओं ने घर पर ही रहकर मतदान किए जाने की सहमति प्रदान की इनकी संख्या मात्र 1284 ही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ये कैसे संभव हो सकता है। इसका सीधा सा मतलब है कि, आंख बंद कर किए गए सर्वे में 26 हजार 2 सौ 91 मतदाताओं को पूर्ण स्वस्थ बता दिया गया है। मंगलवार कराए गए मतदान में 18 मतदाताओं को घरों से गायब होना भी बताया गया है। यहां एक बार फिर बड़ी लापरवाही सामने आ गयी कि जो चिन्हित मतदाता अपने घरों से उठ कर मतदान स्थल तक नहीं जा सकता आखिर वे मतदाता अपने घरों से कैसे गायब हो सकते हैं। कुल मिलाकर निर्वाचन कार्यों में पहले ही चरण में सामने आई इस लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रचार प्रसार नहीं होने से चूक गए कई मतदाता
इस मामले की जब पूरी पड़ताल की गई तो सर्वे कार्य करवाने वाले दलों की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। हजारों का आंकड़ा होने के बाद मात्र 1284 मतदातों की सहमति होने पर ही सवाल खड़े हो रहे हंै। दूसरी तरफ कई वार्डों में कई बुजुर्ग और दिव्यांग जन ऐसे है, जिन्हें घर पर ही मतदान किये जाने की सुविधा मिलनी थी, लेकिन बताया जा रहा है कि इन मत दाताओं के घरों तक ना ही कोई सर्वे दल पहुंचा और ना ही निर्वाचन द्वारा दी जाने वाली ऐसी कोई सुविधा की उन्हें कोई जानकारी मिल पाई। कुल मिलाकर 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और दिव्यांग जनों का सर्वे कार्य किये जाने में घोर लापरवाही बरती गई है। हो सकता है कि, इस लापरवाही के चलते निर्वाचन अपनी मंशा पूर्ण करने में असफल भी साबित हो सकता है, क्योंकि यह देखने वाली बात होगी कि 10 तारीख को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में आखिर कितना मतदान कराया जाता है।
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इनका कहना……
मतदाताओं के सर्वे में पूरी पारदर्शिता बरती गई है, जिनकी सहमति मिली है। बकायदा उनकी पावती हमारे पास है। प्रचार-प्रसार का थोड़ा ईशु हो सकता है।
अमनबीर सिंह बैंस, कलेक्टर बैतूल




