Betul News: बस सेवा के अभाव में बेबस ज़िंदगी

सुविधाओं की आस में बीत गईं पीढ़ियां
Betul News: बैतूल। गांव के बाहर निकलते समय मन में हर दिन एक ही आशंका रहती है। आज कोई साधन मिलेगा या नहीं? समय पर पहुंच पाएंगे या देरी हो जाएगी? और सबसे बड़ा सवाल, लौटेंगे कैसे? इन्हीं आशंकाओं के साथ बैतूल जिले के कई गांवों के ग्रामीणों की पीढ़ियां गुजर गईं। आदिवासी बाहुल्य इस जिले में आज भी अनेक गांव और कस्बे ऐसे हैं, जहां पक्की सड़कें तो बन चुकी हैं, लेकिन बस सेवा के अभाव में लोगों की ङ्क्षजदगी अब भी बेबस बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे इस इंतजार में हैं कि कभी तो गांव से शहर तक बस सेवा शुरू होगी, लेकिन यह सपना अब तक अधूरा है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को कई किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है। कहीं मजबूरी में ऑटो का सहारा लेना पड़ता है, तो कहीं निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो हर किसी के लिए संभव नहीं।
जिले में यात्री बसों का संचालन बेहद सीमित है। अधिकतर बसें केवल उन्हीं मार्गों पर चलाई जा रही हैं, जहां यात्री संख्या अधिक और मुनाफा सुनिश्चित है। दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों की ओर बस संचालकों का रुख नहीं है। मुख्य सड़कों से जुड़े गांवों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश गांवों के लिए आज भी बस सेवा एक सपना बनी हुई है। कुछ गांवों की स्थिति तो और भी चिंताजनक है, जहां अब तक पक्की सड़कें तक नहीं बन पाई हैं।
सरकार द्वारा गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। बारिश के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। कच्चे रास्तों के कारण ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। प्रसूता महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार एंबुलेंस तक गांवों में नहीं पहुंच पाती।
हर ब्लॉक में बस सेवाओं का अभाव
आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले में कुल 10 विकासखंड हैं। इन सभी ब्लॉकों में कई ऐसे गांव हैं जहां सड़कें मौजूद हैं, लेकिन बस सेवाएं नहीं। मजबूरन लोगों को पैदल सफर करना पड़ता है। शाहपुर ब्लॉक के ग्राम रायपुर, पहावाड़ी और पावरझंडा जैसे गांवों तक पक्की सड़कें हैं, लेकिन आवागमन के लिए बस सेवा उपलब्ध नहीं है। शाहपुर से चोपना जाने के लिए कोई नियमित बस नहीं है, जिससे ग्रामीण निजी साधनों या पैदल यात्रा करने को मजबूर हैं।
मुलताई ब्लॉक के बाड़ेगांव और देवरी जैसे गांव मुख्य सड़क से 3 से 4 किलोमीटर दूर हैं। यहां भी बस सेवा का अभाव है। प्रतिदिन कामकाज और पढ़ाई के लिए बाहर जाने वाले लोग या तो पैदल चलते हैं या फिर ऑटो का सहारा लेते हैं। मयावाड़ी पंचायत भी मुख्य सड़क मार्ग से लगभग 4 किलोमीटर दूर स्थित है। भैंसदेही विकासखंड की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। भैंसदेही-झल्लार मुख्य मार्ग से नाद्रा और बोरगांव 3 से 4 किलोमीटर दूर हैं, जहां बस सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह बैतूल-परतवाड़ा मार्ग से टेमुरनी पंचायत करीब 4 किलोमीटर दूर है, लेकिन यहां भी ग्रामीणों को बस सुविधा नहीं मिल पा रही है।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी जिले के कई गांव ऐसे हैं, जहां बस सेवा नहीं पहुंच सकी है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन और शासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दे, ताकि दूरस्थ गांवों के लोगों को भी सुरक्षित, सुलभ और सस्ता परिवहन उपलब्ध हो सके।




