Betul Samachar: एई धुर्वे के महत्वपूर्ण प्रभार छीने, सब इंजीनियर को पावरफुल बनाया

बैतूल नपा में नए सिरे से कार्य विभाजन, भुगतान के लिए भी एई की नहीं पड़ेगी जरूरत
Betul Samachar: बैतूल। नगर पालिका परिषद में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते सहायक यंत्री नीरज धुर्वे को लगभग सभी प्रमुख योजनाओं और वार्डों के निर्माण कार्यों से हटा दिया है। इस संबंध में नगर पालिका कार्यालय से आदेश जारी हो चुके हैं। आदेश के मुताबिक सीवरेज लाइन, वैध-अवैध कॉलोनी से जुड़े कार्य, टीएल , जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन सहित अन्य जिम्मेदारियों का प्रभार एई को सौंपा है। वहीं शहर में वर्षों से बंद पड़ी यूआईडीएसएसएमटी जैसी योजना का प्रभार भी अलग स्तर पर सौंप दिया गया है। इसे कहीं न कहीं एई का नपा में प्रभाव कम करने से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि इस फैसले के साथ नपा के सब इंजीनियरों को वार्डों का स्पष्ट विभाजन कर पूर्ण अधिकार दे दिए हैं। यानी अब वार्डों में होने वाले निर्माण कार्यों की योजना, निगरानी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सीधे सब इंजीनियरों के हाथ में होगी। एक तरह से एई के अधिकारों में कटौती करते हुए सब इंजीनियरों को ज्यादा पावरफुल बना दिया गया है। आदेश के बाद एई अब वार्ड स्तर पर सब इंजीनियरों द्वारा कराए जा रहे कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर पाएंगे। नगर पालिका के इस कदम को लेकर अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं हैं। बताया जा रहा है कि एई को पावरलेस किए जाने के पीछे केवल प्रशासनिक पुनर्संरचना ही नहीं, बल्कि अनुशासनात्मक कारण भी बताए जा रहे हैं।
भुगतान पास कराने एई की अनिवार्यता खत्म
सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों को पर्याप्त तवज्जों न देने और कार्यों में समन्वय की कमी को लेकर असंतोष था। यही वजह मानी जा रही है कि उन्हें धीरे-धीरे जिम्मेदारियों से अलग-थलग कर दिया गया। इस आदेश का एक बड़ा असर यह भी होगा कि अब वार्डों में होने वाले निर्माण कार्यों के भुगतान पास कराने के लिए एई की अनिवार्यता समाप्त हो गई है। खुद एई नीरज धुर्वे का कहना है कि नए आदेशों के बाद भुगतान प्रक्रिया में उनकी भूमिका नहीं रहेगी और सब इंजीनियर स्तर पर ही कार्यों की स्वीकृति व भुगतान आगे बढ़ाया जाएगा।
अनुभव और तकनीकी को नजरअंदाज करना चर्चा में
नगर पालिका के इस फैसले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज है। एक ओर इसे कार्यों में तेजी लाने और जवाबदेही तय करने की कवायद बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सवाल उठ रहे हैं कि क्या अनुभव और तकनीकी समन्वय को नजरअंदाज कर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि एई स्तर के अधिकारी की भूमिका को सीमित करना भविष्य में तकनीकी विवाद और जवाबदेही के संकट को जन्म दे सकता है। फिलहाल नगर पालिका के आदेश लागू हो चुके हैं और सब इंजीनियरों ने अपने-अपने वार्डों में कार्यभार संभालना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह बदलाव शहर के विकास कार्यों को गति देगा या नई प्रशासनिक उलझनें पैदा करेगा, यह देखना बाकी है।
जनप्रतिनिधियों की अनदेखी भी चर्चा में
एई धुर्वे के दायित्वों को कम करने के पीछे नगरपालिका में खूब चर्चा चल रही है। पिछले 6-7 वर्षों से वे नगरपालिका में पदस्थ है और पावरफुल बनकर अपने कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। उनकी कार्यप्रणाली को लेकर कई बार ठेकेदार और पार्षद भी मोर्चा खोल चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से उन पर वर्कलोड अधिक होने के कारण वे जन प्रतिनिधियों की बातों पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे। यही बात नजर अंदाज करना उनके लिए नुकसानदेह साबित हुआ और कई महत्वपूर्ण प्रभार सौंपकर सब इंजीनियरों को सौंप दिए। इस समय नपा में एई के प्रभार छिनने को लेकर अन्य कई कयास भी लगाए जा रहे हैं।
इनका कहना…..
वर्क लोड अधिक होने के कारण काम को बाटा गया है। इससे विकास कार्य में तेजी आएगी। सीएमओ साहब के कार्य विभाजन करने से स्थिति भी सुधरेगी।
नीरज धुर्वे, एई नपा बैतूल।




