Politics: राजनीतिक हलचल: रील से किस जिला प्रमुख की चल रही राजनीति?? किस माननीय के कार्यालय से पुलिसकर्मी खिल रहा गुल??? अध्यक्ष की खरीद-फरोख्त के बाद किसका बस स्टैंड पर क्यों कट रहा टाइम???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

रील से चल रही जिला प्रमुख की राजनीति

एक विपक्षी पार्टी के दल प्रमुख रियल में कुछ भी नहीं करना चाहते हैं, इसलिए रील की राजनीति पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके लिए बकायदा सोशल मीडिया का खूब सहारा लिया जा रहा है। वे जितने सक्रिय रील में दिखना चाह रहे हैं, विपक्षी पार्टी के प्रमुख होने के कारण रियल में कुछ भी नहीं है। उनके पैर भी उनसे एक कदम आगे आकर रील बना रहे हैं और पोस्ट डालकर अपने अंक बढ़ाने के लिए सारी हदें पार करते देखे जा सकते हैं। इसी चक्कर में धुरंधर फिल्म के रहमान डकैत की एंट्री म्यूजिक पर भी रील बनाकर लोगों के लिए नेताजी को मनोरंजन का साधन बना दिया है। इसे चटकारे लगाकर राजनीति में चौक चौराहों पर लोगों को चर्चा करते देखा जा रहा है।

माननीय के कार्यालय से पुलिसकर्मी खिला रहे गुल

सत्ताधारी पार्टी के एक विधायक कार्यालय के हवाले से एक पुलिसकर्मी खूब गुल खिला रहा है। चर्चा है कि इस बात का खुलासा एक मीडियाकर्मी के रिश्तेदार के संपत्ति विवाद में जारी वारंट से हुआ। पूरा थाना चलाने वाले पुलिसकर्मी ने गिरफ्तारी वारंट तामिल कराने में आरोपी से सांठगांठ की और मीडियाकर्मी के रिश्तेदार को यह कहकर रवाना कर दिया कि माननीय के यहां से फोन आया था। चर्चा है कि जैसे ही यह बात मीडियाकर्मी तक पहुंची, वह भी अपने आप को माननीय का खास बताकर खोजबिन में लगे, तब जानकारी सामने आई कि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। बाद में स्थिति स्पष्ट हुई कि माननीय का खास बताने वाला यह पुलिसकर्मी कालेज घोटाले में शुरुआती दौर में अच्छे हाथ भी सेक चुका है। बताया तो यह भी जाता है कि वहां पर भी विधायक कार्यालय के नाम से इसने मलाई खाने के प्रयास किए थे।

अध्यक्ष की खरीद फरोख्त के बाद टाइमपास

एक विपक्षी पार्टी में अध्यक्ष की तथाकथित खरीद-फरोख्त के बाद भूतपूर्व होने पर एक पार्टी के पूर्व प्रमुख की राजनीति टाइमपास पर चल रही है। हालांकि उनके समय पार्टी में विरोध प्रदर्शन और सत्ता पक्ष को ईट का जवाब पत्थर से देने का काम खूब हुआ, लेकिन पार्टी में खरीद-फरोख्त की राजनीति से उन्होंने अपने आप को बैतूल, आठनेर, सारणी आदि जगह जाने वाली बस के टाइम पर ध्यान केंद्रित कर लिया। नतीजा यह है कि जिस दल में अध्यक्ष बदले अब वहां सत्ता का कहीं पर भी विरोध नहीं हो रहा है। जनहित के मुद्दों पर घेरने की राजनीति दिखाई ही नहीं दे रही। इसी वजह इन नेताजी के पूर्व में किए प्रदर्शन को लेकर लोग आज भी याद ताजा कर चर्चा करने से नहीं चूक रहे हैं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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