Betul Samachar: आबकारी-पुलिस में तालमेल नहीं होने का फायदा उठा रहे ढाबा संचालक

कलेक्टर ने भी माना-संयुक्त कार्रवाई होना चाहिए , दोनों विभाग से करेंगे चर्चा
Betul Samachar: बैतूल। तू डाल-डाल, मैं पात-पात की कहावत वर्षों से आबकारी और पुलिस विभाग में देखने को मिल रही है। दोनों विभाग है तो शासकीय, लेकिन तालमेल के अभाव के कारण जिले के सैकड़ों ढाबों पर संयुक्त कार्रवाई के अभाव में खुलेआम शराबखोरी, अघोषित बार का अड्डा होने के साथ मारपीट जैसी घटनाएं हो रही हैं। सांझवीर टाईम्स द्वारा सिलसिलेवार समाचार प्रकाशित करने के बाद पुलिस विभाग कार्रवाई शुरू कर चुका है, लेकिन आबकारी विभाग की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने भी माना है कि सांझवीर ने जो मुद्दा उठाया है, वह सराहनीय है। आबकारी और पुलिस विभाग में तालमेल के लिए वे खुद पहल करेंगे। कलेक्टर ने यह बात भी मानी है कि ढाबों पर आए दिनों विवाद होने के बाद माहौल खराब हो रहा है। इसके लिए संयुक्त कार्रवाई होना आवश्यक है।
जिले में विभिन्न पहुंच मार्गों और शहर के मध्य से गए रास्तों में कुकुरमुत्तों की तरह ढाबें खुल गए हैं। इनके लिए कोई बड़ी प्रक्रिया नहीं होती है। केवल आपूर्ति विभाग से भोजन बनाने की अनुमति ली जाती है। इसमें भी अधिकांश ढाबे किसी भी औपचारिकता को पूरे किए संचालित किए जा रहे हैं। जिला मुख्यालय के पास के ढाबे सबसे अधिक चर्चा में है। चूंकि शहर से सटे ढाबों में पार्टी और शराब परसोने की सुविधा बियर बार की तरह सस्ते में मिलती है, इसलिए ढाबों पर भोजन कम और शराब पिलाने के कारण अघोषित बियर बार जैसे हालात निर्मित हो गए हैं। इन्हीं हालातों की वजह से आए दिनों शराब पीने के बाद युवाओं में मारपीट, चाकूबाजी और अन्य संगीन अपराधों की घटना हो रही है।
सांझवीर टाईम्स ने इन्हीं मुद्दों को लेकर पिछले तीन दिनों से ढाबों की अवैध गतिविधियों के खिलाफ समाचार प्रकाशित किया। संवेदनशील पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने तो इसे गंभीरता से लिया और अधीनस्थों को कई ढाबों के निरीक्षण के लिए भेजा। भले ही विभाग के कुछ विभिषणों की वजह से ढाबा संचालक अलर्ट हो गए और पुलिस को न तो यहां पर शराब मिली और न कोई केबिन में शराब पीते मिले। यह बात किसी को हजम भी नहीं हो रही। हालांकि पुलिस की कार्रवाई की काफी हद तक सराहना हो रही है। एसपी खुद बोल चुके हैं कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
तालमेल के अभाव में ढाबा संचालकों को अभयदान!
इधर जानकारी सामने आ रही है कि ढाबों पर शराब पिलाने और बेचने को लेकर सबसे अधिक जिम्मेदारी आबकारी विभाग की बनती है, लेकिन पर्याप्त स्टाफ होने के बाद भी रूटिन में आबकारी विभाग ढाबों पर निरीक्षण करने की जहमत नहीं उठा पा रहा है। जबकि स्टाफ कम होने पर पुलिस के साथ तालमेल स्थापित कर संयुक्त कार्रवाई के लिए प्रयास किए जा सकते हैं। इसके बावजूद दोनों विभाग में तालमेल नहीं होने का सीधा फायदा ढाबों पर शराब पीने के बाद विवादित स्थिति निर्मित कर रहे हैं और जिले का माहौल खराब हो रहा है।
आबकारी विभाग से तो कई दिनों से ढाबों पर कार्रवाई का प्रेसनोट तक नहीं मिला। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह विभाग केवल कहने का रह गया है। इससे जिले के जनप्रतिनिधियों में खासा आक्रोश है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के आगमन के पहले ढाबों और जिले में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर बड़ी नकेल कसने की तैयारी की जा रही है। इसके परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। इस बारे में जिला आबकारी अधिकारी से चर्चा करने के लिए उनके मोबाइल 7389194819 पर कई बार काल किया, लेकिन आदत के मुताबिक उन्होंने काल रिसीव नहीं किया।
इनका कहना…
आपने बहुत अच्छे विषय पर चर्चा की है। वाकई ढाबों पर अवैध गतिविधियों से माहौल खराब हो रहा है। पुलिस और आबकारी विभाग में संयुक्त कार्रवाई कर अभियान चलाने के लिए निर्देशित किया जा रहा है।
नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल




