Betul Samachar: नौनिहलों के हाथों में स्कूटी-बाइक, अनहोनी से बेखर पालक

सावधानी नहीं बरती तो हो सकता है हादसा
Betul Samachar: बैतूल। नौनिहलों की छोटी-छोटी खुशियों के आगे अक्सर पालक अपने कर्तव्य को भूल जाते हैं। बच्चों की जिद पर कई बार बड़े वाहन विशेषकर स्कूटी और बाइक उनके हाथों में थमा दिए जाते हैं। बच्चा महज़ कुछ दूर स्कूटी स्टार्ट करके चलाना सीख ले, यही देखकर अभिभावक गर्व महसूस करते हैं, लेकिन असल में यही लापरवाही अनहोनी का सबसे बड़ा कारण बन सकती है। बिना लाइसेंस, बिना अनुभव और बिना सडक़ सुरक्षा ज्ञान के दोपहिया वाहन चलाना बच्चों के साथ-साथ राहगीरों के लिए भी बेहद ख़तरनाक हो जाता है। ऐसे ही एक वाकये की फोटो जागरूक नागरिक ने सांझवीर को उपलब्ध कराई, और जनहित में समाचार प्रकाशित करने का भी आग्रह किया। वाकई में यह सोचनीय प्रश्न है कि, पालकों की नजरअंदाजी कब दुख की वजह बन जाए इसका कोई भरोसा नहीं है।
पीछे बैठे बालक के हाथ मे हैंडल, सामने बालक के हाथ में मोबाइल
ताजा मामला है लिंक रोड टिकारी का जहां इस क्षेत्र में संचालित एक बड़े स्कूल में पढऩे वाले दो बालक स्कूटी की बेतहाशा रफ्तार से सवारी करते नजर आए। महज 8 से 9 साल के इन बालको में पीछे बैठे बालक ने स्कूटी का हैंडल सम्भाल रखा था और सामने बैठा बालक मोबाइल पर बात करता नजर आ रहा था। फर्राटे भर रहे बालकों को जब राहगीरों ने समझाने का प्रयास किया तो बालकों का कहना पड़ा कि, जिसे चाहे उसे बता दें उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। एक जागरूक नागरिक ने सांझवीर को फोटो उपलब्ध कराई और चिंता जाहिर की है कि संतान के मोह में पालक इतने बेफिक्र ना हो जाए कि बाद में उन्हें पछताना पड़े। इस पर रोक लगाने के साथ ही पालकों के लिए भी यह विचारणीय प्रश्न है।
छोटी सी गलती बन सकती है हादसों की वजह
आजकल गांव से शहरों तक पालकों में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ा है कि नाबालिग बच्चों को सडक़ पर वाहन दौड़ाने की अनुमति दे दी जाती है। कुछ अभिभावक इसे बच्चों की आधुनिकता और आत्मविश्वास का प्रतीक मानते हैं, परन्तु यह सीधा-सीधा जोखिम है। बच्चों की उम्र अभी खेल, शिक्षा और शारीरिक विकास की होती है, वाहनों की रफ्तार संभालने की नहीं। एक छोटी सी गलती नियंत्रण खोने, सडक़ हादसे, गंभीर चोटों और कई मामलों में जानलेवा स्थितियों तक ले जा सकती है।
पल भर की खुशी , जीवन भर का पछतावा
दोपहिया वाहन चलाना केवल बैलेंस या एक्सिलरेटर चलाना नहीं है, बल्कि ट्रैफिक नियमों का ज्ञान, सडक़ संकेतों को समझना, ब्रेकिंग तकनीक और जोखिम की समझ भी आवश्यक है। ये सभी बातें नौनिहलों की समझ से परे होती हैं। फिर भी अभिभावक अपने स्नेह में गलती को नजरअंदाज कर देते हैं और बस थोड़ी दूर चलाने दो कहकर अनजाने में खतरे के दरवाजे खोल देते हैं। आवश्यक है कि हर पालक जिम्मेदारी को समझे। बच्चों से प्यार करें, लेकिन लापरवाही की कीमत प्यार को नहीं चुकानी चाहिए। वाहन केवल वयस्क और लाइसेंसधारी हाथों के लिए हैं। बच्चों को वाहन देने की गलती से बचें, वरना पल भर की खुशी जीवनभर का पछतावा बन सकती है।
इनका कहना….
नाबालिग बच्चों की ड्रायविंग पर यातायात पुलिस की विशेष नजर रहती है। स्कूलों के आसपास गश्त बढ़ाएंगे।
गजेंद्र केन यातायात प्रभारी , बैतूल पुलिस




