Betul News : 19 हजार 785 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता वाले पारसडोह बांध से किसानों को पानी डेढ़ी खीर

लीकेज सुधारने में जलसंसाधन विभाग को आया पसीना, फसलों के सूखने का मंडराया खतरा

Betul News : बैतूल। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के सरकारी दावे लगातार खोखले साबित हो रहे हैं। मुलताई क्षेत्र के किसानों की जीवनरेखा माने जाने वाले पारसडोह जलाशय से खेतों तक सुचारू रूप से पानी नहीं पहुंच पा रहा है। नतीजा यह है कि फसलों पर सूखे का खतरा मंडराने लगा है और किसान दिन-प्रतिदिन परेशान होकर विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार पारसडोह जलाशय की सिंचाई क्षमता लगभग 19 हजार 785 हेक्टेयर बताई जाती है। इतनी अधिक क्षमता होने के बावजूद जलाशय का लाभ ज्यादातर किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा। नहरों और पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने से लगातार पानी का बहाव रुक-रुक कर बाधित हो रहा है। जगह-जगह पाइप फटने, लीकेज और नहरों में कम प्रेशर की वजह से खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा, जिसके कारण किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं।

मरम्मत के आश्वासन अधूरे, किसानों का धैर्य टूट रहा

कुछ दिनों पहले पानी नहीं मिलने से आक्रोशित किसानों ने रोड पर उतरकर चक्काजाम किया था। विरोध के दौरान अधिकारियों ने तत्काल पाइपलाइन सुधार और नहर मरम्मत का आश्वासन दिया था। किसानों को उम्मीद थी कि समस्या जल्द दूर होगी, लेकिन कई दिनों बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। किसानों का कहना है कि नहरें तो पहुंच गई हैं, लेकिन उनमें पानी का प्रवाह नहीं हो रहा। कई स्थानों पर नहरों का पानी खेतों तक पहुंचने से पहले ही रिसाव के कारण खत्म हो जाता है। मरम्मत के नाम पर विभागीय कर्मचारी केवल औपचारिकता निभा रहे हैं। जितने समय में समस्या दूर की जानी चाहिए, उससे कई गुना अधिक समय लग रहा है, जिससे किसानों का धैर्य टूटता जा रहा है।

फसलों पर सूखने का खतरा, किसानों की बढ़ रही चिंता

मुलताई और पारसडोह जलाशय क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि ऐसी स्थिति कुछ दिनों और बनी रही तो खेतों में लगी गेहूं, चना और अन्य रबी फसलें सूखने लगेंगी। कई किसानों ने बताया कि एक-दो बार सिंचाई न होने से फसलें मुरझाना शुरू हो गई हैं। कृषि लागत पहले ही बढ़ चुकी है, ऐसे में फसल खराब होने पर भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि जल संसाधन विभाग समस्याओं की गंभीरता को समझ नहीं रहा। हर दिन शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं होती। विभाग के रिकॉर्ड में पारसडोह क्षेत्र से दर्जनों शिकायतें प्रतिदिन दर्ज हो रही हैं, लेकिन इन शिकायतों का समाधान अब तक गति नहीं पकड़ सका है।

जल संसाधन विभाग पर उठ रहे सवाल

किसानों का आरोप है कि विभाग के पास पर्याप्त संसाधन और मशीनें होने के बावजूद मरम्मत कार्य बेहद धीमी गति से हो रहा है। कई किसान बताते हैं कि जब पाइपलाइन टूटती है तो उसकी मरम्मत में दो-दो दिन तक देरी हो जाती है। इस दौरान सैकड़ों एकड़ खेतों की सिंचाई बाधित रहती है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त स्थानों की पहचान कर मरम्मत जारी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी स्तर पर इसका असर नजर नहीं आ रहा। किसान चाहते हैं कि विभाग जल्द से जल्द स्थायी समाधान निकाले, ताकि बार-बार ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

किसानों में आक्रोश बढ़ा, जल्द समाधान की मांग

लगातार पानी न मिलने से किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या जल्द दूर नहीं हुई तो वे फिर से आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना सरकार और विभाग का दायित्व है, लेकिन लापरवाही और सुस्ती के कारण फसलें खतरे में हैं। कुल मिलाकर, पारसडोह जलाशय क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुकी है। पाइपलाइन और नहरों की खराब हालत, समय पर मरम्मत की कमी और विभागीय उदासीनता ने किसानों को भारी संकट में डाल दिया है। क्षेत्र के किसानों की एक ही मांग है कि पानी जल्द से जल्द खेतों तक पहुंचे, जिससे उनकी मेहनत और फसल दोनों सुरक्षित रह सकें।

इनका कहना…

क्षतिग्रस्त पाइप लाइन की मरम्मत के लिए सामान बाहर से बुलाना पड़ता है, इस लिए मरम्मत में समय लगता है। किसानों की समस्या का समाधान किया जाएगा।

सीएल मरकाम, ईई, जल संसाधन विभाग, मुलताई

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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