Politics: राजनीतिक हलचल: महिला जनप्रतिनिधि का दिग्गजों से आशीर्वाद, कार्यकर्त्ताओं की पूछ परख कम क्यों?? कौनसे जिला प्रमुख चंगु-मंगू के चंगुल में उलझे??? किन निकायों में पार्षद बम ब्लास्ट की तैयारी में???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

दिग्गजों का आशीर्वाद, कार्यकर्ताओं का अपमान
जिले की एक महिला जनप्रतिनिधि का पिछले दिनों जिले के बड़े अफसर के वैवाहिक कार्यक्रम में प्रदेश की आर्थिक राजधानी जाना हुआ। इसके अगले दिन उनके सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उल्लेख था कि यहां के दिग्गज नेता और वरिष्ठ मंत्री से आशीर्वाद लेने और उनके अनुभव को जानने-सीखने का मौका मिला। यह वही नेता है जिनकी बदौलत अंतिम समय में गत चुनाव में इन्हें उम्मीदवार बनाया गया था।
इस पोस्ट पर कड़वा घुट पीते हुए कई कार्यकर्ता असहज महसूस कर रहे हैं। चर्चा है कि जिन्होंने टिकट मिलने के बाद महिला जनप्रतिनिधि के लिए दिन-रात एक किया वे अपने आप को अपमानित और ठगा महसूस कर रहे हैं। दबी जुबान से कार्यकर्ता चर्चा कर रहे हैं कि उनके लिए चुनाव में बुराइयां ली और अब उनके खुद के काम के लिए महिला जनप्रतिनिधि न तो समय दे रही है और न मिल पा रही है। कार्यकर्ताओं में सुगबुगाहट है कि उनका रवैया इसी तरह रहा तो थोकबंद इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी की सदस्यता ले ली जाएगी। यदि ऐसा हुआ तो आने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी डगर कठिन हो सकती है।
जिला प्रमुख को चंगु-मंगू के चंगुल में
विपक्ष के एक जिला प्रमुख इन दिनों अपने ही दो चंगु-मंगू के ऐसे चंगुल में फंसे हैं कि उनकी जगड़न से चाह कर भी नहीं निकल पा रहे हैं। चंगु-मंगू की सक्रियता से बाकी लोगों के लिए स्पेस खत्म हो गया है। पार्टी के ही कार्यकर्ता बताते हैं कि इनमें से इतना बड़ा चापलूस है कि कुछ वर्ष पहले इनके घर के शुभारंभ पर एक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थी। फोटो में जिला प्रमुख के परिजनों की फोटो भी लगाकर छोटी कर दी तो दीवार पर टांगने के बाद विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। इसी बात से कार्यकर्ता अंदाजा लगा रहे हैं कि जिला प्रमुख सभी कार्यकर्ताओं को अहमियत देने के बजाए चंगु-मंगू के कान भरने से ही उत्तेजित हो जाते हैं और इसी आवेश में आकर अपने ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को खरी-खोटी सुनाने से नहीं चुुकते हैं।
निकायों में बम ब्लास्ट की तैयारी
जिले की दो निकायों में अध्यक्षों की कार्यप्रणाली से नाराज होकर पार्षद किसी भी समय विस्फोट करने की तैयारी में है। चूंकि पार्टी मुखिया इसी जिले से है, इस बात का लिहाज करते हुए लंबे समय से कार्यकर्ता चुप बैठे हैं। चर्चा है कि अपने काम न होने के कारण कार्यकर्ता सारे वरिष्ठ नेताओं को दुखड़ा बता चुके हैं, लेकिन उन्हें हर तरफ से नजर अंदाज किया जा रहा है।
एक नपा अध्यक्ष तो ऐसे हैं, जो विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं और उन्हें बात करने तक की तमीज नहीं है। महिला कार्यकर्ताओं और पार्टी के नेताओं को भी एक मामले में मिलने जाने पर खरीखोटी सुना डाली। अब वे पार्टी के रडार पर बताए जा रहे हैं। इसी तरह एक प्रमुख नगरपालिका की महिला अध्यक्ष भी पार्षदों की अनदेखी के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नजरों में है। चर्चा है कि यदि मामला वरिष्ठों ने सुलझाया तो किसी भी समय अविश्वास प्रस्ताव रखने से पार्टी की किरकिरी हो सकती है।




