Betul News: दो डीएफओ के भरोसे चल रहा वन विभाग, दीपावली पर कर्मचारियों की काली दिवाली
Betul News: Forest department is running on the basis of two DFOs, Black Diwali of employees on Diwali

ज्ञापन देने के बावजूद, अधिकारियों की निष्क्रियता आई सामने
Betul News: बैतूल। जिले का वन विभाग इन दिनों अव्यवस्था का शिकार बना हुआ है। विभाग के अधिकांश कामकाज केवल दो डीएफओ के भरोसे चल रहे हैं। पश्चिम और दक्षिण वन मंडल के डीएफओ के तबादले के बाद मात्र पश्चिम वन मण्डल में डीएफओ लक्ष्मीकांत वासनिक की पदस्थापना हो पाई है। इन्हें अतिरिक्त प्रभार के रूप में दक्षिण का प्रभार दे दिया गया है। इससे फील्ड स्तर पर निगरानी और काम की गति बुरी प्रभावित हो रही है। नतीजा दीपावली जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी विभाग के कई भुगतान रुके हुए हैं। इसके बाद कई कर्मचारी और जंगलों में काम करने वाले मज़दूरों तक की दिवाली काली ही रहेगी।
सूत्रों ने बताया कि मजदूरों, ठेका कर्मियों और नियमित कर्मचारियों के बिल बीते कई हफ्तों से लंबित पड़े हैं। जंगलों में हाल ही में पौध रोपण सहित कई काम कराए गए हैं, जिसमे कर्मचारियों सहित श्रमिक और चौकीदारों को वेतन भुगतान नहीं हो पाया है। कुल मिलाकर त्योहार के समय मजदूरों सहित पूरे वन विभाग को भुगतान न मिलने से उनका त्यौहार फीका पड़ गया है। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि समय पर वेतन और भत्ते न मिलने से घर का बजट बिगड़ गया है। दीपावली पर जहां हर ओर रोशनी और खुशियां हैं, वहीं वन विभाग के कर्मचारी पर आर्थिक तंगी के चलते परिवार भी फीकी दिवाली मनाए जाने के लिए मजबूर है।
एक डीएफओ के पास तीन प्रभार, कैसे निभेगी जिम्मेदारी
विभागीय सूत्रों के अनुसार, उच्च अधिकारियों की कमी और फाइलों के अटके रहने के कारण कार्यों की स्वीकृति सहित भुगतानों में विलम्ब से यह स्तिथि निर्मित हुई है। जिला कार्यालयों से लेकर रेंज स्तर तक फाइलों की मंजूरी के लिए लंबी प्रक्रिया अपनाना पड़ रहा है, जिससे शासकीय भुगतान प्रभावित हो रहे हैं।केवल उत्तर वन मण्डल के एकमात्र डीएफओ नवीन गर्ग के पास ही उत्तर वन मण्डल सहित उत्पादन वन विद्यालय, डिपो के चार्ज देकर रखे गए हैं। कर्मचारियों ने शासन से मांग की है कि विभाग में जल्द अधिकारियों के पदस्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाए ताकी रुके हुए भुगतान सहित अन्य कार्य सुचारू रूप और समय पर किए जा सकें, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने। फिलहाल, दो डीएफओ के कंधों पर पूरे जिले के वन विभाग का जिम्मा है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सीधा असर पड़ रहा है और इसका खामियाजा कर्मचारियों व मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है।




