Betul Samachar: जिला अस्पताल में बड़े कांच से ओपीडी पर्ची में गलतियां

Betul Samachar: Mistakes in OPD slip due to big glass in district hospital

आपरेटरों को आवाज सही नहीं आने से मरीजों को हो रही परेशानी

Betul Samachar: बैतूल। जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल की ओपीडी पर्ची व्यवस्था को लेकर मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओपीडी पर्ची बनाने वाले काउंटर पर लगी मोटी कांच की शीट के कारण कंप्यूटर ऑपरेटर तक मरीजों की आवाज स्पष्ट रूप से नहीं पहुंच पाती। इस वजह से मरीजों के नाम, उम्र, पिता या पति का नाम, गांव का नाम और अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज करने में लगातार गलतियां होती रहती हैं। ऐसी त्रुटियां कई बार मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन जाती हैं।

अस्पताल में हर दिन जिले के दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए आते हैं। सोमवार से शुक्रवार तक ओपीडी में मरीजों की संख्या एक हजार के करीब पहुंच जाती है। भीड़ अधिक होने और काउंटर पर पर्याप्त संवाद न हो पाने के कारण ऑपरेटर अक्सर अनुमान के आधार पर विवरण दर्ज कर देते हैं, जिससे गलतियों की आशंका बढ़ जाती है। कई बार ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीज स्थानीय बोली में बात करते हैं या उनकी आवाज कम रहती है। मोटी कांच की दीवार के चलते उनकी बात सुनना और भी मुश्किल हो जाता है।

लंबी लाइन लगाने के लिए मजबूर मरीज

इन गलतियों का असर कई बार बहुत गंभीर रूप ले लेता है। ओपीडी पर्ची में नाम गलत होने से मरीज का पूरा रिकॉर्ड प्रभावित हो जाता है। दवाइयां, टेस्ट रिपोर्ट, रेफर स्लिप और भविष्य के इलाज की प्रक्रियाएँ सभी पर्ची में दर्ज नाम और विवरण पर आधारित होती हैं। गलती पता चलने पर मरीज को फिर से लंबी लाइन में लगना पड़ता है और संशोधन कराने में काफी समय बर्बाद होता है। कई मरीजों की हालत गंभीर होती है, ऐसे में समय की बर्बादी उनके लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है। सबसे चिंताजनक स्थिति तब पैदा होती है जब किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है।

ऐसे मामलों में परिजनों को रिकॉर्ड मिलान के लिए अस्पताल की पर्ची की आवश्यकता होती है। लेकिन यदि पर्ची में नाम या उम्र गलत दर्ज हो, तो परिजनों को दस्तावेज़ सुधारने के लिए अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार एक छोटी सी त्रुटि को ठीक कराने में घंटों नहीं, बल्कि कई दिन लग जाते हैं। परिजनों को मानसिक तनाव के साथ-साथ शारीरिक और आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है।

कई मामलों में पुलिस की होती है फजीहत

कुछ मामलों में पुलिस को भी कठिनाई आती है। किसी दुर्घटना, अपराध या अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में अस्पताल के रिकॉर्ड को आधिकारिक दस्तावेज़ के रूप में माना जाता है। यदि ओपीडी पर्ची में नाम या उम्र गलत हो, तो पुलिस को सत्यापन में समस्या आती है और जांच प्रक्रिया प्रभावित होती है। कई बार पहचान तय करने में देरी हो जाती है, जिससे कानूनी कार्रवाई पर असर पड़ता है।

इन सारी समस्याओं को देखते हुए मरीजों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन से काउंटर सिस्टम में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि कांच की जगह इंटरकॉम, माइक्रोफोन सिस्टम या स्लाइडिंग विंडो की व्यवस्था की जाए, जिससे मरीजों और ऑपरेटर के बीच संवाद बेहतर हो सके। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ जगदीश घोरे से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्ककिया गया, लेकिन संपर्कनहीं हो सका।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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