Politics: राजनीतिक हलचल: किस नेता द्वारा की गई नियुक्ति चर्चा का केंद्र बनी?? किस पार्टी के जीजा- साले की जोड़ी कमाल करने के बजाय फ़िसड्डी साबित हुई??? दिवाली मिलन में विपक्ष के किस नेता को खानी पड़ी मुंह की???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

बिना आधार की नियुक्ति चर्चा में
एक विपक्षी पार्टी के अपरिपक्व अध्यक्ष ने अनुसांगिक छात्र संगठन में एक ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति कर डाली। चर्चा है कि इस नियुक्ति को लेकर जमकर बवाल मचा है। जिस जगह अध्यक्ष ने यह नियुक्ति की है, वहां पर पहले से ही कई निष्ठावान छात्रनेता मजबूती से अपनी दावेदारी जता रहे थे और इधर नियम-कायदे ताक पर रखकर पार्टी प्रमुख ने अपने खास सिपाहसलार को ब्लाक अध्यक्ष बना डाला। बताया जा रहा है कि छात्र विंग की नियुक्ति प्रदेश अध्यक्ष ही कर सकते हैं। पार्टी के जिला प्रमुख को विधानसभा अध्यक्ष बनाने का कोई अधिकार ही नहीं है, फिर भी नियुक्ति कर बवाल मचा दिया है।
जीजा-साले की फेल जोड़ी का कमाल
विपक्षी पार्टी में एक जीजा और साले की अपने क्षेत्र में ब्लॉक अध्यक्ष की वर्षों से की गई नियुक्ति पूरी तरह से फेल साबित हो गई है। यहां चर्चा है कि जीजा तो लंबे समय से ब्लाक अध्यक्ष पद पर रहते हुए मलाई खा रहे हैं, जब उनके नेता बड़े पद पर भी थे, तब माननीय भी। तब इनकी पांचों उंगली घी में थी। अब चूंकि बड़े नेता चुनाव हारे और पार्टी सत्ता से भी गई तो नेताजी खुद कहते फिर रहे हैं कि दो जून की रोटी बमुश्किल नसीब हो रही है। आर्थिक तंगहाली का हवाला देकर फीलगुड महसूस कर रहे हैं। इन्होंने ही अपने पावर का इस्तेमाल करते हुए अपने झोलाछाप साले को भी ब्लाक प्रमुख पर नियुक्ति करा दी। यह साले जी केवल जीजा के इशारे पर झंडा उठा रहे हैं। जब से इन्हें भी ब्लाक अध्यक्ष बनाया है, कोई छाप नहीं छोड़ पाए हैं। अब जिले की विपक्षी राजनीति में बदलाव हुआ तो कलयुगी जीजा के साले ने गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए उनके साथ हो लिए। यह बात जीजा को हजम नहीं हो रही है। राजनीति में जीजा-साले की यह जोड़ी पर आने वाले समय में किसके साथ जुड़े रहते हैं। इसका बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।
चर्चा में दिवाली मिलन पर हुआ अपमान
हाल ही में एक राजनीति दल का दीपावली मिलन समारोह संपन्न हुआ। वैसे तो यह दीपावली मिलन कई तरह से बहुत खास रहा। बड़ी संख्या में दिग्गजों के जमावड़े के कारण कई अमिट छाप छोड़ दी, लेकिन पड़ोसी नगरपरिषद की एक पार्षद और उसका पति भी इस आयोजन में तीन दिन तक नजर आया। चर्चा है कि उस दल के एक कार्यकर्ता ने मजाकिए लहेजे में पार्षद पति को टोक दिया कि रोज हाजिरी क्यों लगा रहे? चूंकि वे विपक्ष में थे। हालांकि उनकी मंशा अब यहां से बदल गई, लेकिन कार्यकर्ता के मुंह से निकली यह बात सुनकर वे चुपचाप निकल गए। यह बात वहा खड़े लोगों ने सुनी तो चर्चा चौक-चौराहें तक चटकारे लगाकर सुनी जा रही है।




