Politics: राजनीतिक हलचल: नए सीएमओ को लेकर नौलखा पार्षद में बेचैनी क्यों?? सत्तारूढ़ पार्टी में अपने ही अपने के कैसे बने दुश्मन??? राजनीति में 2 धुरंधर अलग-अलग, फिर दिल क्यों मिले???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

नए सीएमओ को लेकर नौलखा पार्षद की बैचेनी
एक निकाय में नए सीएमओ कौन आएंगे? इसको लेकर स्टाफ में उतनी बैचेनी नहीं है, जितनी नौलखा पार्षद में। पिछले 25 दिनों से इस निकाय में सीएमओ का पद रिक्त पड़ा है। वैसे तो कई सीएमओ यहां पर आने के लिए लॉबिंग कर रहे थे, लेकिन माली हालत खराब और व्यवस्थाएं चौपट होने के कारण सभी ने धीरे-धीरे दूरी बना ली। हालांकि यह नौलखा पार्षद अब सीएमओ को लेकर अपने सूत्रधारों के माध्यम से लॉबिंग कर रहा है।
इसकी वजह बताई जा रही है कि कोई टेढ़ा सीएमओ आ गया तो वर्षों से चली आ रही नपा में उनकी दुकानदारी समेटने में समय नहीं लगेगा। इसी वजह वे अपने सूत्रों के सहारे राजनीति के वरिष्ठ जानकारों को सीएमओ के बारे में पट्टी पढ़ाने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन उन्हें असफलता हाथ लगी है। दुकानदारी प्रभावित न होने इसके लिए नौलखा पार्षद अवकाश के बाद फिर अपने राजनीतिक आकाओं के साथ भोपाल की दौड़ धूप करने वाले हैं।
अपने ही बने दुश्मन
सत्तारूढ़ पार्टी के जिला मुख्यालय से 18 किमी दूर एक मंडल के नेता अपने ही पार्टी के वरिष्ठ नेता के पीछे हाथ धोकर भीड़े हैं। चर्चा है कि इसके पीछे मंडल अध्यक्ष क्षेत्र में उक्त नेता की सप्लाई की दुकानदारी नहीं चलने दे रहे हैं। इसके पीछे कुछ दिनों पहले वाक युद्ध सामने आने की खबर है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जानकारी मिलने पर दोनों ही नेताओं को फटकार लगाई जा चुकी है, लेकिन कुछ दिन मामला शांत रहने के बाद एक बार फिर मतभेद और मनभेद दोनों उजागर होने से इस क्षेत्र में पार्टी की जमकर किरकिरी हो रही है। दुकानदारी चलने को लेकर यह विवाद किसी दिन बड़ा रूप धारण करने की चर्चा है। बताते चले कि यह वही मंडल है, जहां पर एक प्रसिद्ध अस्पताल का मुखयालय है।
राजनीति में विरोधी, दिल से एक
राजनीति में विरोधी होने के बावजूद एक दूसरे की कुशलक्षेम पूछना आम बात है, लेकिन दो वरिष्ठ नेताओं के बीच कभी-कभी यह कवायद अलग रूप धारण कर लेती है। मामला एक विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है। पार्टी के दो वरिष्ठ नेता पहले साथ थे, लेकिन एक ने दामन छोड़कर सत्ता पक्ष का हाथ थाम लिया। कहने को तो वे फिलहाल एक दूसरे के घोर विरोधी है, लेकिन पिछले दिनों न्यायालय के एक चर्चित फैसले के दौरान दोनों की करीबिया देखने को मिली। पक्ष में फैसला आने के बाद दोनों नेताओं ने गले मिलकर एक दूसरे को बधाई दी। इसके बाद एक ने राजधानी तो दूसरे ने अपने गृह क्षेत्र में आकर प्रकरण में बरी होने की खुशिया मनाई। यह जिले की राजनीति में एक सुखद संकेत कहे जा सकते हैं।




