Betul Ki Khabar: चार आदिवासियों की निजी भूमि वन विभाग को क्रय करने की अनुमति देने का आरोप

Betul Ki Khabar: Four tribals accused of allowing the forest department to purchase their private land

मनावर विधायक ने राज्यपाल को पत्र लिखकर जताई आपत्ति, बैतूल में नया विवाद खड़ा

Betul Ki Khabar: बैतूल। सिहोर जिले में हाल ही में वन ग्रामों में बसे वनवासियों के झोपड़े तोड़े जाने के मामले ने पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल मचा दी थी। अब ऐसा ही एक नया विवाद बैतूल जिले से सामने आया है, जहां मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने चार आदिवासियों की निजी भूमि को एक ही दिन में वन विभाग द्वारा क्रय किये जाने की अनुमति मिलने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

डॉ. अलावा ने इस पूरे मामले को आदिवासियों के भूमि अधिकारों का हनन बताया है और इसे प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करार दिया है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल को पत्र भी लिखा है और मामले में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। अलावा का आरोप है कि कलेक्टर बैतूल ने चार आदिवासियों की निजी भूमि को एक ही दिन में वन विभाग को क्रय करने की अनुमति प्रदान कर दी। इन चारों ही प्रकरणों में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार एवं एसडीओ का प्रतिवेदन नहीं बुलवाया गया।

आदिवासियों के कलेक्टर ने बयान तक दर्ज नहीं किए। रजिस्ट्री निरस्त करने का आवेदन कलेक्टर बैतूल के समक्ष प्रस्तुत किया है। घोड़ाडोंगरी के ही आदिवासियों की निजी भूमि पर वन विभाग ने 1974 से कब्जा कर लिया, जिसके अर्जन की कार्यवाही हुई, लेकिन भू अर्जन अधिनियम 1894 की धारा 4 के अनुसार अधिसूचना प्रकाशित नहीं हुई, धारा 11 के अनुसार अर्जन का अवार्ड नहीं हुआ। भूमि पर वन विभाग का ही कब्जा है। विधायक ने आदिवासियों को उनके संवैधाानिक, वैधानिक अधिकार दिलवाएं जाने की मांग राज्य पाल से की है।

क्या कहता है कानून?

अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वनवासी (वन अधिकार) कानून 2006 के अनुसार आदिवासियों की भूमि को किसी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था द्वारा अधिग्रहित करने के पहले ग्रामीण सभा की अनुमति, समुचित मुआवजा, और पुनर्वास योजना अनिवार्य होती है। यदि यह प्रक्रिया दरकिनार की गई है, तो यह मामला कानूनी कार्रवाई का विषय बन सकता है। विधायक द्वारा राज्यपाल को भेजा गया पत्र इस मुद्दे को राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर भी गंभीर बना रहा है।

प्रशासन मौन, जांच की मांग तेज

मामले को लेकर अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और आदिवासी नेताओं ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर जांच की मांग उठाई है। यदि यह आरोप सही सिद्ध होते हैं, तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि आदिवासी अधिकारों पर सीधा प्रहार माना जाएगा।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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