Betul Samachar: Video: पशु आहार के बाद नपा की गौशाला में कुत्तों का हमला, कई गायों की मौत

Betul News: Dogs attack Municipal Corporation's cowshed after animal feed, many cows die

सांझवीर की टीम सुबह गौशाला पहुंची तो 6 गायों के शव मिले, गौशाला की दुर्दशा के लिए नपा और एनजीओ जिम्मेदार

Betul Samachar: बैतूल। जिले की कढ़ाई स्थित नगरपालिका की गौशाला एक बार फिर सुर्खियों में है। कभी घटिया पशु आहार तो कभी लापरवाही के आरोपों से घिरी यह गौशाला अब आवारा कुत्तों के हमले का शिकार बन गई है। जानकारी मिली है कि, ताजा घटनाक्रम में यहां छह गौमताओं की दर्दनाक मौत हो गई , देर रात आवारा कुत्तों के झुंड ने गौशाला में घुसकर कमजोर और बीमार गायों पर हमला कर दिया। सुबह जब देखा गया तो 6 गायें मृत अवस्था में पड़ी थीं, और कुछ तड़प रही थीं। हालांकि नपा अधिकारियों ने कुत्तों के हमले से मौत होने के तथ्य को नकार दिया है, वे पॉलीथिन खाने को मौत की वजह बता रहे हैं।

लगातार गौमाताओं के साथ घटित हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि गौशाला की सुरक्षा व्यवस्था लंबे समय से लचर है। बाड़े टूटे हुए हैं और चारों ओर गंदगी फैली रहती है। गायों के मृत शरीर कई कई दिन पड़े रहते हैं, इन पर सफेद पावडर डाल दिया जाता है। बाद में इन्हें नपा की जेसीबी से गड्ढे कर दफनाना अब रोज का ही शगल बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि नपा द्वारा गौशाला का सन्चालन सही तरीके से किया जाता रहा, लेकिन जब से नगरपालिका ने इस गौशाला का संचालन कामधेनु नामक एनजीओ को सौंपा है, तभी से यहां अव्यवस्था का माहौल है।

पहले घटिया चारे और पानी की कमी से कई गौवंशों की जान गई थी, अब कुत्तों के हमले ने एक बार फिर व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। कर्मचारियों को उन्हें सीमित संसाधनों में काम करना पड़ता है। पशु चिकित्सक की नियमित मौजूदगी तक नहीं रहती, जिससे बीमार गायों का इलाज नहीं हो पाता। अब कुत्तों के हमले में मारी गई मृत गायों को जेसीबी की मदद से दफनाने की तैयारी की जा रही है।

गौशाला गौ सेवा का प्रतीक नहीं बल्कि लापरवाही का अड्डा बनी

स्थानीय ग्रामीणों ने इस घटना पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लगातार गौवंशो की मौत हो रही है, लेकिन उन कतिथ गौसेवकों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जो रातों में हाइवे पर खड़े होकर गौवंशो की तस्करी रोकने के चलते अपनी पीठ खुद थप थपाने से नहीं चूकते। जबकि गौशाला गौसेवा का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन यहां लापरवाही और अनदेखी का बोलबाला है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा वह नगरपालिका जिसने संचालन का जिम्मा एनजीओ को सौंप दिया, या वह एनजीओ जो देखरेख करने में नाकाम साबित हो रहा है? इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि नगरपालिका इस हादसे की जिम्मेदारी तय कर कोई ठोस कार्रवाई करती है या नहीं। फिलहाल, मासूम गौमताओं की मौत ने शहरवासियों के मन में गहरी पीड़ा और आक्रोश दोनों निर्मित कर दिए हैं।

शव ऐसे पड़े कि देखने वालों की आंखें छलक जाए

सांझवीर टाईम्स की टीम ने मंगलवार सुबह एक बार फिर नगरपालिका की एनजीओ द्वारा संचालित गौशाला की आंखों देखी तस्वीर देखी तो नजारा वीभत्स था। दरअसल यहां पर आधा दर्जन जिंदा गायों के बीच मृत पड़ी थी। कुछ गायों के शरीर पर कुत्तों के काटने के जख्म स्पष्ट देखे जा रहे थे। कुछ गायों के शव तीन दिन पुराने होने के कारण कीड़े रेंगते नजर आए। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गायों की मौत होने के बावजूद एनजीओ ने इनका अंतिम संस्कार किया और नपा के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। यही वजह है कि कुत्तों के हमलों और अन्य कारणों से गायों ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। इसके साथ ही नपा के अधिकारियों की लापरवाही एक बार फिर उजागर हो गई है।

इनका कहना….

गौवंशों की मौत कुत्तों के हमले से नहीं हुई है, बल्कि पॉलीथिन की वजह से हो रही है, सभी गौवंशो के ऑपरेशन कराए जाने हैं। ताकी पॉलीथिन निकलने के बाद वे स्वस्थ हो सकें

सतीश मटसेनिया, सीएमओ नपा बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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