Betul News: गौशाला में गायें तड़प रही और गौसेवक तमाशा देख रहे

Betul News: Cows are suffering in the cowshed and cow protectors are watching the spectacle.

गौसेवा के नाम राजनीति चमकाने वाले संगठनों की चुप्पी पर सवाल

Betul News: बैतूल। इसे विडंबना ही कहा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा कि जिले में गौसेवा के नाम कई संगठन काम कर रहे हैं। छोटे-छोटे मामलों में अखबारों में विज्ञप्ति जारी कर वाहवाही लूटने से नहीं चुकते हैं और उधर नगरपालिका की आधिपत्य वाली कढ़़ाई गौशाला में गौमाता तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही है। पिछले चार दिनों से सांझवीर टाईम्स गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर सिलसिलेवार समाचार प्रकाशित कर रहा है, लेकिन जिले में गौ भक्त बनने वाले तथाकथित संगठनों की चुप्पी पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके बाद अंदाजा लगाया जा सकता है कि औपचारिकता और अपनी राजनीति चमकाने के लिए तथाकथित संगठन जिले में अपना वर्चस्व स्थापित करने के अलावा कुछ और नहीं कर पा रहे हैं।

कढ़ाई में नगरपालिका की गौशाला में 130 गौमाता मौजूद होने का दावा किया जा रहा है। पिछले दिनों नगरपालिका ने थोक में 65 मवेशियों को पकड़कर पैदल ही गौशाला भेज दिया था। इसके बाद यहां पर अचानक मवेशियों की संख्या में इजाफा हो गया। फिलहाल यहां का संचालन एक एनजीओ द्वारा किया जा रहा है, लेकिन उनकी लापरवाही की वजह से गौशाला में मौतों का सिलसिला थमते दिखाई नहीं दे रहा है। सांझवीर टाईम्स द्वारा गौमाता की मौत के बाद पिछले चार दिनों से लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद पशु प्रेमियों में खासा आक्रोश है। सोशल मीडिया पर उनकी नाराजगी देखी जा रही है।

संवेदनशील कलेक्टर भी कढ़ाई स्थिति नपा की गौशाला में गायों की मौत के बाद सीएमओ को गौशाला भेजकर व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मवेशियों का टीकाकरण कर दवाइयों का वितरण किया गया। इसके बाद मवेशियों की स्थिति में काफी सुधार आया है। सांझवीर टाईम्स की इस पहल का पशु प्रेमियों ने स्वागत किया है।

कहां है दम भरने वाले गौसेवक?

मवेशियों की तस्करी पर हल्ला बोलने वाले तथाकथित गौसेवकों की इस मामले में पोल खुलते नजर आ रही है। दरअसल 2-4 माह में एक बार मवेशियों से भरे वाहन पकड़कर वाहावाही लूटने वाले तथाकथित गौसेवक संगठन के कर्ताधर्ता गौशाला में मवेशियों की मौत पर चुप्पी साधकर बैठे हैं। जबकि एसपी लेकर अन्य अधिकारियों को यह बात अच्छे से मालूम है कि जिले की सीमा से हर दिन महाराष्ट्र मवेशियों की तस्करी होती है। इसे रोकने के लिए तैयारियां की जा रही है, लेकिन जिले के गौसेवा संगठन के कर्ताधर्ता कढ़ाई गौशाला में मवेशियों की मौत पर चुप्पी साधे बैठे हैं। केवल ईद के चांद की तरह इन्हें विशेष मौकों पर ही प्रकट होते देखा जाता है या फिर कोई अधिकारी आए तो उनके स्वागत करने में संगठन के लोग पीछे नहीं रहते हैं। इसी वजह इनकी चापलूसी वाली गौसेवा पर कई बार सवाल उठाएं जा चुके हैं।

हर रास्ते से हो रही गौतस्करी

वर्तमान में जिले की कई सीमा से रात के अंधेरे में गौतस्करी का सिलसिला जारी है। सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र के कत्लखाने कई वाहन हर दिन आधा दर्जन से अधिक थानों को पार कर पहुंच रहे हैं। यदि वास्तविक समाजसेवा और गौसेवक करने वाले जिले की सीमा से गुजरे फोरलेन पर निगरानी करें तो हर दिन गौतस्करी का भंडाफोड़ हो सकता है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि तथाकथित गौसेवक केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए विशेष अवसरों पर देखे जा रहे हैं। इसी वजह जिले में पुलिस का नेटवर्क भी गौसेवकों की वजह से फिसड्डी साबित होते जा रहा है।

इनका कहना….

हमने कढ़ाई गौशाला की अव्यवस्था को लेकर दो मर्तबा ज्ञापन दिया है। इसके बावजूद नपा ने कोई ध्यान नहीं दिया। गायों की मौत पर एक बार फिर कलेक्टर से मिलकर वस्तुस्थिति से अवगत कराएंगे।

दीपक मालवीय, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय हिंदू सेना बैतूल

इस बारे में हमको जानकारी मिली है। एक मर्तबा घायल गाय को गौशाला छोड़ने गए थे तब पता चला था कि गौशला का संचालन एनजीओ कर रहा है। बाकी सारी व्यवस्था नपा द्वारा संभाली जा रही है। गायों की मौत का मामला संज्ञान में आया है। हम जल्द बैठक लेकर रणनीति बना रहे हैं। कलेक्टर को शीघ्र ज्ञापन सौंपेंगे।

कृष्णकांत गावंडे, प्रांत गौरक्षक प्रमुख, बजरंग दल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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