Betul Samachar: 400 पुलिसकर्मियों को अभी भी किराए के मकान में रहने की मजबूरी
Betul News: 400 policemen are still forced to live in rented houses

कंडम भवन की जबरन मरम्मत भी की जा रही नजरअंदाज, विभागीय अधिकारी को ध्यान देने की जरूरत
Betul Samachar: बैतूल। जिले में तैनात पुलिस कर्मियों की आवासीय समस्या लगातार जस की तस बनी हुई है। कहीं पुलिस कर्मियों के रहने के लिए कंडम हो चुके भवनों की जबरन मरम्मत कराई जा रही है, तो कहीं पुलिस कर्मियों के परिवार अपनी जान हथेली पर रखकर खण्डहरों में निवास करने पर मजबूर हैं। दूसरी तरफ हालात ये हैं कि जिले के थाना चौकियों में पदस्थ करीब 400 पुलिस जवान आज भी किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।
हालांकि पुलिस विभाग की ओर से आवासीय सुविधा की मांग की गई, लेकिन अब तक ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है। सूत्र बताते हैं कि पुलिस हाउसिंग बोर्ड द्वारा जो नए क्वार्टर बनाये गए हैं, उसके टॉप फ्लोर की छत और दीवारों में भी सीपेज की गंभीर समस्या सामने आ रही है, जिससे परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कुल मिलाकर कंडम भवनों की जबरन मरम्मत और नए कंस्ट्रक्शन में लापरवाही के चलते सरकारी राजस्व का दोहन कहीं से कहीं तक ठीक नजर नहीं आ रहा है।

संज्ञान में होने के बावजूद समस्या नजरअंदाज
सूत्र बताते हैं कि कई पुराने पुलिस क्वार्टर कंडम स्थिति में पहुंच चुके हैं, लेकिन उनकी नवीन र्निर्माण की दिशा में अधिकारी कोई रुचि नहीं दिखा रहे, बल्कि 40 साल पुराने हो चुके भवनों का मेकअप कर उन्हें रहने लायक बनाये जाने के लिए सरकारी धन की बर्बादी की जा रही है।हालांकि अधिकारियों का तर्क है कि जिस भवन की मरम्मत कराई जा रही है वह 40 साल नहीं बल्कि 33 साल पुराना है जिसे कंडम नहीं कहा जा सकता है।इसके बावजूद यदि मरम्मत कराई जा रही है तो भविष्य में इसका नतीजा यह निकलेगा कि पुलिस कर्मियों के परिवारों को या तो पहले से ही खतरनाक हो चुके टूटे-फूटे मकानों में रहना पड़ेगा या निजी मकान मालिकों पर निर्भर रहना होगा। इससे उनकी जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।
850 की जिले मे तैनाती, 450 अब भी किराए के मकान में
मौजूदा हालात यह बयान कर रहे हैं कि, जिले के 16 थाने और चौकियों में पदस्थ करीब 4 सैकड़ा सब इंस्पेक्टर और सिपाही किराए के मकानों में रह रहे हैं। वर्तमान में जिले में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियो को मिलाकर कुल 850 का बल मौजूद है। सूत्र बताते हैं कि जिला मुख्यालय सहित जिले के अन्य थानों में पुलिस कर्मियों के रहने के लिए मात्र 400 क्वार्टरों की ही व्यवस्था है। शेष बचे करीब 450 पुलिस कर्मी आज भी किराए के मकानों पर निर्भर हैं। यहां भी समस्या इनका पीछा नहीं छोड़ रही है।
सूत्र बताते हैं कि ड्यूटी का दबाव अलग और आवास की चिंता पुलिस कर्मियों को अलग से परेशान करती है। कई बार मकान मालिक भी समय पर किराया बढ़ाने या अन्य शर्तें थोपने लगते हैं। ऐसे में जवानों के सामने मानसिक तनाव की स्थिति भी बनती है। कुछ पुलिस कर्मियों का मानना है कि, पुलिस कर्मियों के लिए कंडम भवनों के पुनर्निर्माण की जगह नए क्वार्टरों का निर्माण कराया जाना जरूरी है। भले ही निवास छोटा हो लेकिन इसकी गुणवत्ता सुधारने की दिशा में कदम तो उठाये ही जा सकते ऐसा नहीं होता है तो, यह समस्या ज्यों की त्यों बनी रहेगी। सरकार और विभाग दोनो को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
इनका कहना….
जिस भवन की मरम्मत कराई जा रही है वह 33 साल पुराना है, नियम के मुताबिक 40 साल पुराना भवन कंडम घोषित किया जा सकता है। आवासों की कमी की समस्या बनी हुई है। करीब 4 सैकड़ा से अधिक पुलिस कर्मी किराए के मकान में रह रहे हैं। भविष्य में आवासों की समस्या के समाधान के लिए प्रयास लगातार जारी हैं।
दिनेश मर्सकोले आरआई बैतूल पुलिस




