Betul Ki Khabar: Video: इंदौर के बाद अब बैतूल के जिला अस्पताल में चूहों की दस्तक

Betul Ki Khabar: Video: After Indore, now rats knock in the district hospital of Betul

प्रबंधन अलर्ट मोड पर, जागरूक पाठक ने सांझवीर को उपलब्ध कराया वीडियो

Betul Ki Khabar: बैतूल। इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों की मौजूदगी और करतूत की वजह से दो नवजातों की मौत जैसी दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। इस गंभीर मामले पर हाईकोर्ट ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब भी मांगा है। यह मामला पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोर रहा है। इस बीच बैतूल जिले के सबसे बड़े सरकारी जिला अस्पताल में भी इसी तरह का खतरा मंडराने की आशंका ने प्रबंधन के कान खड़े कर दिए हैं। लिहाजा प्रबन्धन को अलर्ट मोड पर आना पड़ा है।

हाल ही में जिला अस्पताल पुरुष सर्जिकल वार्ड की सीढ़ियों पर चूहे के बच्चे की चहल-कदमी का एक वीडियो सामने आया है, जिसे एक जागरूक पाठक ने सांझवीर टाईम्स को उपलब्ध कराया है। यह वीडियो दो दिन पुराना बताया जा रहा है। स्वाभाविक रूप से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब चूहे का बच्चा अस्पताल में चहल कदमी कर रहा है तो बड़ी संख्या में चूहों की गैंग अस्पताल में मौजूद रहने से इंकार नहीं किया जा सकता है। यह गैंग कभी भी बड़े हादसे को अंजाम दे तो इंकार नहीं किया जा सकता है।

वीडियो वायरल, अस्पताल में हड़कम्प

वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। इस मामले की जानकारी मिलते ही तत्काल सिविल सर्जन डॉ. जगदीश घोरे को अवगत कराया गया। इसके बाद उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों के लिए चूहों की बढ़ती मौजूदगी को गंभीरता से लेते सतर्कता के निर्देश जारी कर दिए हैं। डॉ. घोरे का कहना है कि अस्पताल में हर तीन माह में पेष्ट कंट्रोल करवाया जाता है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियो को सतर्क रहने सहित चप्पे चप्पे की निगरानी किये जाने के निर्देश दिए गए हैं।

चूहों कि मौजूदगी खतरे का संकेत

गौरतलब है कि जिला अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज कराने आते हैं और बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं व नवजात शिशु भी भर्ती रहते हैं। ऐसे में चूहों की मौजूदगी गंभीर खतरे का संकेत है।वैसे भी इंदौर की घटना ने साफ कर दिया है कि यह लापरवाही कितनी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। यदि समय रहते व्यवस्थाएं नहीं सुधारी गईं, तो स्थिति भयावह हो सकती है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन ने परिसर की सफाई और चूहों को खत्म करने के लिए त्वरित कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कदम पर्याप्त होंगे या फिर व्यवस्थाओं में स्थाई सुधार के लिए ठोस रणनीति बनाई जाएगी। मरीज और उनके परिजन उम्मीद कर रहे हैं कि जिला अस्पताल में ऐसी स्थिति दोबारा न देखने को मिले।

इनका कहना…

मामला संज्ञान में आया है, वैसे तो प्रति तीन माह में पेष्ट कंट्रोल किया जाता है। अभी कर्मचारियों को निगरानी और सतर्कता के निर्देश दे दिए गए हैं।

डॉ. जगदीश घोरे, सिविल सर्जन जिला अस्पताल बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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