Betul Samachar: सदर में करोड़ों की लागत से बनाए चबूतरों का अस्तित्व खत्म
Betul News: Platforms built at the cost of crores in Sadar have ceased to exist

अब सड़कों पर लग रहा बाजार, जनता की कमाई पानी में
Betul Samachar: बैतूल। शहर के सदर क्षेत्र में कुछ वर्षों पूर्व बाजार व्यवस्थित करने के नाम पर करोड़ों की लागत से नगर पालिका द्वारा बनवाए गए चबूतरों का अब कोई अस्तित्व ही नहीं बचा है। जनता की गाढ़ी कमाई से बने ये चबूतरे इसलिए बनाए गए थे पर यहां व्यवस्थित रूप से बाजार लगेगा और दुकानदारों के साथ लोगों को भी खरीदारी करने में सुविधा होगी, लेकिन आज हालात बिल्कुल उलट हैं।
करोड़ों खर्च होने के बावजूद नपा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही ने इस योजना को ऐसा पलीता लगाया कि जिस उद्देश्य से चबूतरे बनाए थे, वह ही पूरा नहीं हो पाया और चबूतरों की जगह मैदान नजर आ रहा है। व्यवस्थित बाजार की जगह अब व्यापारी सड़क पर ही दुकानें सजाने लगे हैं। दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानियों का सामना अलग करना पड़ रहा है।
स्वहित के चक्कर मे सारे दावे फेल, कोई पूछने वाला नहीं?
यह हाल सिर्फ चबूतरों का ही नहीं बल्कि शहर की कई योजनाओं का है। अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से करोड़ों की योजनाएं केवल कागजों में चमकती रही हैं, जमीनी हकीकत में उनका हाल बदहाल हो चुका है। सदर बाजार में चबूतरे बनाते समय यह दावा किया गया था कि यहां सब्जी और अन्य बाजार व्यवस्थित होंगे, जिससे ट्रैफिक की समस्या भी खत्म होगी, लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद दुकानदारों ने इन्हें छोड़ सड़क किनारे दुकानें जमाना शुरू कर दिया और नपा मूकदर्शक बनी रही।
नपा की लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि आज सड़क पर ही बाजार लगता है और चबूतरे नदारद हो चुके हैं। जनता की गाढ़ी कमाई का यह साफ दुरुपयोग है। करोड़ों की राशि खर्च करने के बाद भी जनता को सुविधा नहीं मिल सकी। सवाल यह उठता है कि जब योजना पर इतना खर्च हुआ तो उसका सही क्रियान्वयन आखिर क्यों नहीं हुआ? और जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?
गंभीरता दिखाई जाती तो बाजार हो सकता था व्यवस्थित
दरअसल यह चबूतरे शहर की बदहाल योजनाओं की बर्बादी की पहचान बन चुके हैं। आम लोगों का कहना है कि यह बर्बादी सिर्फ कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का ही परिणाम है। यदि शुरुआत से ही योजना पर गंभीरता दिखाई जाती, तो आज सदर क्षेत्र में बाजार व्यवस्थित होता और लोगों को जाम, अव्यवस्था और गंदगी से भी राहत मिलती, लेकिन अफसोस की बात है कि यहां जनता की गाढ़ी कमाई पानी में बहा दी गई।




