Betul Ki Khabar: अंबेडकर चौक का फव्वारा, साल में एक बार ही चलता है?
Betul Ki Khabar: The fountain at Ambedkar Chowk runs only once a year?

इस काम में भी नपा लगा चुकी है लाखों की चपत
Betul Ki Khabar: बैतूल। शहर के बीचोंबीच स्थित अंबेडकर चौक का फव्वारा शोभा बढ़ाने के लिए लगाया गया था, लेकिन अब यह अपनी वास्तविक उपयोगिता खो बैठा है। नपा द्वारा लगाई गई लाखों रुपए की चपत के बाद इस फव्वारे का संचालन पूरे साल मुश्किल से एक-दो बार ही होता है। वह भी त्योहार या किसी विशेष अवसर पर ही इसे चलाया जाता है, बाकी समय यहां सिर्फ पानी भरा रहता है। इसमें लार्वा पनपते रहते हैं।
नपा प्रशासन की लापरवाही का जीता जागता नमूना
स्थानीय लोगों का कहना है कि अंबेडकर चौक पर बना यह फव्वारा नपा प्रशासन की लापरवाही और रखरखाव की कमी के कारण बेकार साबित हो रहा है। इसमें जमा हुआ पानी पूरे साल सड़ांध मारता है और हकीकत में मच्छरों का स्थायी घर बन चुका है। बारिश के दिनों में तो स्थिति और भी खराब हो जाती है। आसपास से गुजरने वाले राहगीर बदबू और मच्छरों की परेशानी झेलने को मजबूर हो जाते हैं।
नपा ने संविधान निर्माता की प्रतिमा के आसपास सजावट तो ठीकठाक कर रखी है। लेकिन जो फव्वारा लगाया गया है, उसका कोई उपयोग ही कभी देखने को नहीं मिला। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जब फव्वारे की कोई उपयोगिता ही नहीं थी तो क्यों जान बूझकर जनता की कमाई इस पर खर्च की गई।
दावों के उलट, दिख रही जमीनी हकीकत
स्वच्छता और सुंदरता के नाम पर बनाए गए इस फव्वारे पर खर्च की गई राशि आज सवालों के घेरे में है। नगर पालिका हर साल इसकी सफाई और देखभाल का दावा करती है, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है। न तो पानी की समय-समय पर निकासी होती है और न ही मशीनों का संचालन नियमित किया जाता है।
शहर वासियों की मांग है, कि इस फव्वारे को नियमित रूप से चालू रखा जाए, ताकि यह अपनी उपयोगिता सिद्ध कर सके, या फिर पानी की निकासी और रखरखाव की ठोस व्यवस्था बनाई जाए। अन्यथा यह फव्वारा सुंदरता बढ़ाने के बजाय बीमारियों को न्योता देता रहेगा। प्रशासन को चाहिए कि इस ओर गंभीर ध्यान देकर इसे सही मायनों में शहर की शान बनाए।




