Betul Samachar: वन विभाग में ऑपरेटरों की नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद
Betul News: Nepotism in the appointments of operators in the forest department

जांच के निर्देश भी ठंडे बस्ते में, सीसीएफ बोली- जांच होगी, फिर कार्यवाही भी
Betul Samachar: बैतूल। वन विभाग के विभिन्न वन मंडलों में कम्प्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्तियों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो इन नियुक्तियों में योग्यता को दरकिनार कर विभागीय कर्मचारियों के रिश्तेदारों को बिना किसी प्रक्रिया के नियुक्त किया गया है। हैरानी की बात यह है कि उच्च अधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कनिष्ठ अधिकारी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं।
सूत्र बताते है कि तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक पीजी फुलझेले के पास इन नियुक्तियों में गड़बड़ी को लेकर कई शिकायतें पहुंची थीं। उन्होंने तत्काल प्रभाव से दोषी ऑपरेटरों को हटाने के निर्देश दिए थे। लेकिन इन निर्देशों को अमल में लाने के बजाय कुछ अधिकारी उन्हीं शिकायतों को आधार बनाकर कार्यवाही को टालते रहे।
रिश्तेदारों को प्राथमिकता, योग्य अभ्यर्थी दरकिनार
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, कुछ वन मंडलों में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां कर्मचारियों के पुत्र और पुत्रियों को कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में बिना किसी चयन प्रक्रिया के नियुक्त कर दिया गया। एक मामले में वाहन चालक का बेटा भी वन मंडल कार्यालय में कार्यरत पाया गया, जो किसी भी मापदंड पर खरा नहीं उतरता।
विज्ञापन और चयन प्रक्रिया की नहीं रही कोई पारदर्शिता
ऑपरेटरों की नियुक्ति के लिए न तो कोई विज्ञापन निकाला गया और न ही कोई योग्यता या चयन मापदंड तय किए गए। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया विभागीय अधिकारियों के व्यक्तिगत स्वार्थ और भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई। इससे योग्य उम्मीदवारों का हक छिन गया।
सूत्रों ने यह भी खुलासा किया है कि पश्चिम, दक्षिण, उत्तर और उत्पादन वन वृत्तों में ऐसे करीब 10 ऑपरेटर चिन्हित किए गए थे, जिन पर भुगतान की राशि अपने रिश्तेदारों के खातों में डालने के आरोप लगे थे। इन मामलों में से एक में एक ऑपरेटर को हटाया भी गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में उसे गुपचुप तरीके से फिर से बहाल कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण में विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहां उच्च अधिकारी अनुशासनात्मक कार्यवाही के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कनिष्ठ अधिकारी कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि मामला केवल कुछ ऑपरेटरों का नहीं, बल्कि पूरी भर्ती प्रणाली में गहराई तक फैले भ्रष्टाचार का है।
जल्द हो सकता है खुलासा
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, सीएम हेल्पलाइन, वित्त एवं बजट विभाग समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से की गई है। यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो यह पूरा प्रकरण उजागर हो सकता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
इनका कहना….
मामले की जांच कराई जा रही है। ऑपरेटरों के खिलाफ की गई शिकायतों का परीक्षण भी किया जा रहा है। दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
वासु कनोजिया, मुख्य वन संरक्षक, बैतूल।




