Betul News: 7 पिल्लर पानी बढ़ने के बाद नींद से जागा कोल प्रबंधन
Betul News: Coal management woke up from sleep after 7 pillar water increased

पानी निकालने के लिए उपकरण बुलाए, सेफ्टी बोर्ड मेंबर भी पहुंचे निरीक्षण करने
Betul News: सारनी (कालीदास चौरासे)। कोल इंडिया लिमिटेड में भूमिगत खदानों को काफी संवेदनशील माना जाता है, लेकिन सीआईएल की अनुषंगी कंपनी डब्ल्यूसीएल पाथाखेड़ा क्षेत्र में भूमिगत खदान को बहुत ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जाता। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्यूंकि यहां तवा खदान के ई-9 सेक्शन में लगभग एक पखवाड़े में करीब 7 पिल्लर पानी बढ़ गया और प्रबंधन बेफिक्र रहा। वह भी तब जब पांच माह पहले इसी पाथाखेड़ा क्षेत्र में रूफ फाल होने से तीन कोल कर्मियों को काल के गाल में समाना पड़ा था।
तवा खदान में 7 पिल्लर तक पानी बढ़ने का सीधा मतलब है कि छतरपुर खदान में हुई दुर्घटना से कोई सबक नहीं लिया। बताया तो यह भी जा रहा है कि एक सप्ताह तक पानी निकालने कोई पहल ही नहीं की गई। वह भी तब, जब यह भी बताया जा रहा है कि जहां पानी बढ़ रहा है। वहां रुफ फाल भी हुआ है। इसी के चलते पानी निकालने अब भारी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। खदान में पानी भरने की सूचना मिलते ही सीटू यूनियन के डब्ल्यूसीएल सेफ्टी बोर्ड मेंबर प्रमोद अर्जुनकर ने पाथाखेड़ा क्षेत्र का दौरा कर खदान में बारीकी से निरीक्षण किया है। जिसकी रिपोर्ट तैयार कर यूनियन के वरिष्ठ नेताओं और कंपनी के अधिकारियों तक पंहुचाएंगे।
बाहर निकाल रहे प्रॉपर्टी
खदान में लगातार बढ़ रहे पानी के चलते पंप, स्टाटर, एलएचडी मशीन, युडीएम, बेल्ट जैसी उपयोगी और कीमती प्रॉपर्टी को बाहर निकाल रहे हैं। दरअसल अब तक पानी निकालने की जितनी कोशिश तवा वन प्रबंधन द्वारा की गई है। वह नाकाफी रही है। इसी के चलते बाहर निकालना बेहतर समझा जा रहा है। ई-9 सेक्शन में तेजी से बढ़ रहे वाटर लेवल के चलते उक्त सेक्शन से लगभग कोयला उत्पादन ठप्प हो गया। जिसके चलते कंपनी को अच्छा खासा नुकसान वहन करना पड़ रहा है। फिलहाल पानी निकालने सेवन डीप 65 लेवल ईस्ट और नाइन डीप 65 लेवल ईस्ट में 1000 और 800 जीपीएम क्षमता के दो पंप इंस्टाल किए हैं। वहीं तड़ाली महाराष्ट्र से 1 हजार गैलन क्षमता का तीसरा पंप लाने की प्रक्रिया की जा रही है।
यह चूक पड़ी भारी
खदान सूत्र बताते है कि तवा खदान तीन लेयर में हैं। जिसमें अपर सिम, लोअर सिम और बगडोना शामिल हैं। बताया जा रहा हैं कि लोअर सिम में डिप्लेरिंग तो किया गया है पर उसका पानी बाहर नहीं निकाला गया। अब यही चूक भारी पड़ रही है। जानकार बताते है कि डिप्लेरिंग के लिए बोर होल करना आवश्यक होता है। नियम अनुसार तवा प्रबंधन ने 4 बोर तो किए पर 3 में पानी नहीं निकलने कि बात सामने आ रही है। जबकि एक बोर में पानी निकला पर उसे मात्रा में नहीं निकला, जिस मात्रा में लोअर सिम में पानी था। 4 बोर करना बताकर डीजीएमएस से डिप्लेरिंग की अनुमति मिल गई। इसके बाद स्लाजिंग करके रिप और स्टूक ख़तम कर दिए गए। संभवत: इसी से गोपेज एरिया बढ़ गया, जो रूफ फाल का कारण हो सकता है।
सीएम सेक्शन में आया फाल्ट
पाथाखेड़ा क्षेत्र की तवा खदान में फिलहाल दो सेक्शन चल रहे थे। जिसमें ई नाइन और डब्ल्यू-8 सीएम सेक्शन शामिल है। ई नाइन में वाटर लेवल बढ़ने ह्यद्ग कोयला उत्पादन प्रभावित हो गया है। जबकि डब्ल्यू 8 सीएम सेक्शन में फाल्ट आने के चलते यहां से भी कोयला उत्पादन प्रभावित हो रहा है। बताया जा रहा है कि सीएम को चलाने लगभग 20 मीटर रास्ता बनाना पड़ रहा है। जिसका काम भी शुरू हो गया है। खदान में पानी भरने और कोयला उत्पादन प्रभावित होने के चलते प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। इस खदान में 586 अधिकारी, कर्मचारी कार्यरत है।




