Politics: राजनीतिक हलचल: माननीय पुत्र के टेंपरेरी कनेक्शन का आखिर सच क्या है?? पड़ गया, पर किसका जलवा आज भी बरकरार??? रेत खनन को लेकर सामाजिक संगठनों की यह कैसी टेंशन???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……
Politics: Political stir: What is the truth about the temporary connection of the honorable son??

माननीय पुत्र के टेम्परेरी कनेक्शन का सच
जिले के वरिष्ठ माननीय के पुत्र की चर्चा इन दिनों खूब हो रही है। अपने क्षेत्र में उन्होंने सक्रियता बढ़ाने के साथ-साथ अधिकारियों पर खूब डोरे डालना शुरू किया है। इसके लिए सुरक्षा यंत्र लेने की चर्चा चल रही है। इस बीच खबर है कि एक प्रभारी अधिकारी से माननीय पुत्र ने सुरक्षा यंत्र लेेने से मना किया तो वे आग बबूला हो गए। चर्चा है कि पिछले दिनों माननीय पुत्र उक्त अधिकारियों से मिलने पहुंचे तो तब, अधिकारी ने आधी पेटी में भी सुरक्षा यंत्र लेने से इंकार दिया।
उनका कहना था कि उनका तो टेम्परेरी कनेक्शन (अस्थाई जिम्मेदारी) है, मैं लेकर क्या करूंगा। इस पर माननीय पुत्र नाराज हो गए। पहले यूनिफार्म वाले विभाग के जिम्मेदार को सुरक्षा यंत्र को लेकर चर्चा चल रही थी कि अब बैतूल से सप्ताह में अपडाउन कर उस क्षेत्र का जिम्मा संभालने वाले अस्थाई अधिकारी पर माननीय पुत्र डोरे नहीं डाल सके। बताते चले कि यह माननीय पुत्र बहुसंख्यक समाज से आते हैं और अधिकारी शहर के लोगों से जुड़े एक विभाग के अस्थाई प्रभारी है।
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पुराने अध्यक्ष का जलवा बरकरार
राजनीति में कहते हैं कि पद गया, रूतबा गया, लेकिन एक पार्टी में ऐसा नहीं हो रहा है। कुछ दिनों पहले इस पार्टी के अध्यक्ष की विदाई हुई तो नए को जिम्मेदारी मिली। इसके बावजूद पुराने अध्यक्ष का जलवा अभी भी बरकरार है। यह बात इसलिए कही जा रही है, क्योंकि वे अध्यक्ष न रहते हुए भी कुछ धार्मिक आयोजनों में मत्था टेकने पहुंचे तो क्षेत्र के बड़े से लेकर छोटे पदाधिकारी उनके ईद-गिर्द दिखाई दिए। शुरू से लेकर बैतूल आने तक पदाधिकारियों ने पुराने अध्यक्ष की खूब आव भगत की। सोशल मीडिया पर भी उनकी फोटो खूब सुर्खियां बटोर रही है। यह अध्यक्ष अपने समय में पावरफुल होने के साथ कार्यकर्ताओं में काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। इसी वजह जिले के कोने-कोने में उनके कट्टर समर्थकों की कमी नहीं है।
रेत खनन को लेकर यह कैसे टेंशन
वैसे तो सामाजिक संगठन समाज के लिए काम करते हैं। इसके बावजूद कुछ सामाजिक संगठन के पदाधिकारियों ने इसे अपनी आर्थिक कमाई का जरिया बना लिया। अदिवासी समाज से जुड़े कुछ संगठन और सेना जैसा नाम देकर काम करने वाले तथाकथित पदाधिकारी इन दिनों रेत खनन को लेकर समय-समय पर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते। कुछ दिनों बाद यह पोस्ट हटने से इन पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि इन पर रेत खनन के मामले पर इनकी इतनी टेंशन क्यों हैं? चर्चा है कि आर्थिक लाभ के कारण दबाव बनाने की रणनीति के तहत पोस्ट डालकर डिलीट करना इनका शिफूगा बन गया है। इसी वजह रेत कारोबारी चुटकी लेते हुए कहते देखे जाते हैं कि आखिर उनका भी पेट हमसे ही भरता है।




