Betul Ki Khabar: आफत की बारिश और घटिया सिस्टम से शहर जाम
Betul Ki Khabar: City jammed due to catastrophic rain and poor system

लल्ली चौक से कोतवाली तक सड़क पर 70 गड्ढे, केंद्रीय विद्यालय से स्टेशन तक 5 जगह जल भराव
Betul Ki Khabar: बैतूल। शहर इन दिनों बारिश और बदहाल सिस्टम की दोहरी मार झेल रहा है। हालात ऐसे हैं कि थोड़ी सी तेज बारिश पूरे शहर को जाम कर देती है। ऐसे हालात तब बन रहे हैं, जब कोठीबाजर में सड़क निर्माण चल रहा है। अब गंज क्षेत्र में आबकारी से लेकर स्टेशन तक की बात करें तो इसके हालात तो और खराब है। मार्ग से आवागमन लोगों के लिए मुसीबत बन गया है।
जानकारी के मुताबिक कोठीबाजार में सड़क की एक लेन बनाई जा चुकी है। दूसरी लेन बनाने के लिए डाला गया बेस बारिश में बह चुका है। इतना सब होने के बावजूद भी जिम्मेदार अपनी आंखें बंद करके बैठे हैं। सड़कों पर नजर डालें तो लल्ली चौक से कोतवाली तक की प्रमुख सड़क पर करीब 70 गड्ढें उभर आए हैं। कुछ मीटर की दूरी पर बने यह गड्ढें दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं। बारिश में इन गड्ढे पानी में पानी भरा जाने से वाहन चालकों को पता ही नहीं चलता है कि सड़क पर गड्ढें हैं। इस स्थिति में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

गंज की मुख्य सड़क पर जलभराव
अब बात करते हैं शहर की दूसरी प्रमुख और व्यवसायिक क्षेत्र की सड़क की। इस क्षेत्र में डे्रनेज सिस्टम पूरी तरह से फैल हो चुका है। सड़क पर जल भराव की स्थिति बन रही है। केंद्रीय विद्यालय से स्टेशन तक के मार्ग पर कम से कम आधा दर्जन हिस्सों में जलभराव की स्थिति साफ नजर आ रही है। केंद्रीय विद्यालय, आबकारी कार्यालय, मस्जिद चौक, दिलबहार चौक सहित स्टेशन के सामने पानी थमने यहां से आवागमन किसी परेशानी से कम नहीं है।
इससे न सिर्फ ट्रैफिक बाधित होता है, बल्कि स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह पानी भरे रहने से डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा अलग बढ़ गया है। नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका और प्रशासन केवल बारिश के पहले योजनाओं की बात करता है, लेकिन जमीन पर काम नहीं होता।
गड्ढों की मरम्मत और नालियों की सफाई सिर्फ कागजों में होती है। नतीजा यह है कि हर साल बारिश शहर के लिए आफत बनकर आती है। स्थानीय प्रशासन से नागरिकों की मांग है कि जल्द से जल्द सड़कों की मरम्मत कराई जाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए। नहीं तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।




