Betul News: ट्रेनों में नकली किन्नरों का कब्ज़ा: यात्रियों से जबरन वसूली का खेल, किसके फायदे का सौदा?

नकली किन्नरों के आतंक का पर्याय बना ट्रेन का सफर

Betul News: बैतूल। नागपुर डिवीजन के अंतर्गत ट्रेनों में अवैध वेंडरों के बोलबाले के बाद ट्रेनों में चलने वाले नकली किन्नरों का गिरोह भी खुलेआम यात्रियों से वसूली कर रहा है। यात्रियों की संरक्षा और सुरक्षा को किस तरह ताक पर रख दिया गया है, इसकी बानगी पांढुर्ना से इटारसी रेलवे स्टेशन के बीच आसानी से देखा जा सकता है। नकली किन्नर जिस तरह से सज संवर कर ट्रेनों में रोजाना रेल यात्रियों से जबरन वसूली कर रहे हैं। उससेअसली किन्नरों की छवि भी धूमिल हो रही है। सवाल ये है कि आखिर रेलवे और आरपीएफ की नाक के नीचे यह सब किसकी मिलीभगत से हो रहा है? जबकि रेल यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षा के लिए इन्हें प्रति माह हजारों रुपए वेतन के रूप में दिए जा रहे हैं।

आशीर्वाद के नाम पर 10 या 20 नहीं, हजारों की वसूली

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक पांढुर्ना से इटारसी के बीच सुबह 4 बजे से नकली किन्नरों के खेल शुरू होता है। कई ट्रेनों में नकली किन्नर बनकर एक समाज विशेष की महिलाएं यात्रियों से जबरन पैसे ऐंठ रही हैं। आशीर्वाद के नाम रेल यात्रियों से दस, बीस नहीं, बल्कि सैकड़ों रुपए वसूले जाते हैं। जो यात्री देने से मना करे, उसे अपमानित करने या धमकाने से भी गुरेज नहीं किया जाता। इस तरह एक दिन में एक नकली गिरोह के सदस्य हजारों रुपये कमा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि यात्रियों की सुरक्षा संभालने वाले बल ने खुद यात्रियों को ही नकली किन्नरों के हवाले कर रखा है। कार्यवाही के नाम पर कभी कभार कागजी खाना पूर्ति कर ली जाती है।

10 से 12 महिलाएं नकली किन्नर बनकर कर रही वसूली

सूत्र बताते हैं कि आपसी मिलीभगत से ये गिरोह पूरे संगठित तरीके से काम करता है। 10 से 12 महिलाएं इस गिरोह में शामिल हैं। ट्रेन रुकते ही किन्नर बनी महिलाएं डिब्बों में चढ़ जाती है। दो-तीन स्टेशनों तक घूमकर पैसे इक_ा करते हैं और फिर अगले स्टेशन पर उतर जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ रेलवे पुलिस की मौजूदगी में होता है, लेकिन कोई रोक-टोक नहीं होने से रेल यात्रियों में असुरक्षा की भवनाएं निर्मित हो रही हैं तो वहीं रेलवे की छवि को भी बट्टा लगाया जा रहा है।

असली किन्नरों की साख पर लग रहा बट्टा

ट्रेनों में नकली किन्नरों की अवैध वसूली से असल किन्नर समुदाय के लोग भी परेशान हैं। उनका कहना है कि कुछ महिलाओं ने किन्नर का नाम लेकर ट्रेनों में ठगी और वसूली का कारोबार बना लिया है। इससे समाज में असली किन्नरों की साख खराब हो रही है, जिन्हें समाज पहले ही हाशिए पर रखता आया है। रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए कई दावे करता है, मगर ये नकली किन्नर उन दावों की पोल खोल रहे हैं। यात्री डरे-सहमे सफर कर रहे हैं, तो वहीं गिरोह बेखौफ कमाई कर रहा है। अब सवाल उठता है कि क्या रेलवे अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं, या फिर यह फायदे का सौदा किसी के संरक्षण में चल रहा है? जरूरत है कि आरपीएफ और जीआरपी संयुक्त अभियान चलाकर इन नकली गिरोहों पर नकेल कसें। नहीं तो आने वाले दिनों में यात्रियों की जेब पर डाका डालने वाले नकली किन्नर ट्रेन सफर का नया आतंक बन जाएंगे।

इनका कहना…

यह मामला गंभीर है, लेकिन हमारे संज्ञान में अब तक नहीं आया है। यदि ट्रेनों का नाम पता चल जाए तो प्राथमिकता से कार्रवाई करेंगे। फिर भी आज ही स्टाफ को फर्जी किन्नरों की धरपकड़ करने के लिए निर्देशित किया जाएगा।

राजेश बनकर, टीआई आरपीएफ बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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