Betul News: अवैध कालोनियां का अंतिम प्रकाशन भूली नपा

Betul News: Nagar Palika forgot to publish the final report of illegal colonies

272 कालोनियों के लोग अभी भी परेशान, स्टीमेट भी बनाए, लेकिन आगे कोई ठोस प्रयास नहीं करने से नतीजा

Betul News: बैतूल। जिले में अवैध कालोनियों का मकड़जाल फैला हुआ है। पूर्व में जिले की 350 में से 272 कालोनियों का ही अंतिम प्रकाशन किया है। शेष कालोनियों में लेआउट और प्राक्कलन तैयार नहीं किए गए हैं। इसी वजह इन कालोनियों में लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। ऐसी कालोनियों में सर्वाधिक संख्या बैतूल नगरपालिका के अंतर्गत आती है। वर्ष 2016 के पूर्व की 93 और इसके बाद की कुल 25 अवैध कालोनियों में मूलभूत सुविधाओं दरकार है। कलेक्टर ने बैतूल नपा को पूर्व में ही अंतिम प्रकाशन करने के लिए निर्देश दिए थे, लेकिन इसकी अनदेखी कर दी गई। यही वजह है कि बैतूल के बाद अन्य नगरीय क्षेत्रों में भी इस तरह के नियमों का पालन नहीं किया गया।

जानकारी के मुताबिक जिले में कुल 350 कालोनियां सरकारी रिकार्ड में तर्ज की गई थी। इन कालोनियों को अंतिम प्रकाशन कराने के लिए कलेक्टर ने क्षेत्र के एसडीएम, सीएमओ को निर्देशित किया था। जिले में सर्वाधिक कालोनियों की बात की जाए तो बैतूल शहर में इसकी संख्या अधिक थी। कलेक्टर ने विशेष रूप से ध्यान देकर इन कालोनियों का अंतिम प्रकाशन करवाया था। इसके बाद आज तक इन कालोनियों की नपा ने सुध नहीं ली है। भूलने की आदत नपा के अधिकारियों पर अधिक हावी होने के कारण कलेक्टर के आदेशों का पालन भी नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि कलेक्टर के आदेश की न सिर्फ बैतूल बल्कि अन्य क्षेत्र में बनी अवैध कालोनी के मामले में संबंधित अधिकारी कर रहे हैं।

स्टीमेट बनाकर भूले अधिकारी

बैतूल नगरपालिका के अंतर्गत वर्ष 2016 के पूर्व 93 अवैध कालोनियां दर्ज थी। इसके बाद 25 कालोनियां दर्ज की गई है। कुल ृ118 कालोनियां बैतूल नपा के अंतर्गत दर्ज है। इन कालोनियों में कलेक्टर के निर्देश पर लोगों को मूलभूत सुविधाएं दिलाने के लिए सीएमओ के निर्देश पर एई ने मूलभूत सुविधाएं दिलाने के लिए निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक अधिकांश कालोनियों में सड़क, ड्रेनेज सहित अन्य समस्याएं बनी हुई है। नपा ने बकायदा इन कालोनियों में कागजी तौर पर प्रकरण बनाकर ड्राइंग डिजाइन तैयार की है और बकायदा सड़क, नाली बनाने के लिए स्टीमेट भी बनाए, लेकिन आज तक यह धरातल पर नहीं उतरा। यही वजह है कि स्थिति नियंत्रण के बाहर होते जा रही है।

78 कालोनियां के अंतिम प्रकाशन नहीं

यहां पर चौकाने वाली बात यह है कि कलेक्टर ने कुल 350 कालोनियां चिन्हित कर सभी में लेआउट और प्राक्कलन तैयार कर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कहा था, लेकिन कलेक्टर के आदेश को दरकिनार करते हुए 350 में से महज 272 कालोनियों का अंतिम प्रकाशन कराया गया। यानि अभी भी 78 कालोनियां ऐसी हैं, जिनका अंतिम प्रकाशन नहीं होने से यहां पर मूलभूत सुविधाएं दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। इतना ही नहीं वर्ष 2016 के बाद जो 48 कालोनियां दिखाईजा रही है, उसमें भी अब तक कोई कार्रवाई होते नजर नहीं आ रही है। इसी वजह कलेक्टर के आदेश की बैतूल नपा के अलावा अन्य जगह खुलेआम अवहेलना हो रही है।

इनका कहना….

कालोनियों को लेकर वित्तीय संबंधी कार्रवाई होती है। इसे पूरा होने में समय लगता है। मैं पूरी तरह से इस पर नजर रख रहा हूं, जितनी भी कालोनियां हैं, जिनका प्रकाशन कराया गया है, सभी में काम करने के लिए निर्देशित किया गया है। शेष बची कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।

नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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