Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: क्या है ईंट से जुड़ा मामला? जिसने कर दी थानेदार की छुट्टी……तबादले को लेकर डीजीपी के आदेश का क्यों हो रहा उल्लंघन??? नपा के किस साहब को रिटायरमेंट के पहले फीलगुड महसूस हो रहा???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

Prashasnik Kona: Administrative corner: What is the matter related to the brick? Which got the SHO dismissed......

ईट के नाम पर नोट और पहुंच गए लाइन

करोड़ों के घोटाले की कई माह से जांच करने वाले एक थानेदार की कुर्सी पल भर में ही खिसक गई। इसे लेकर हमलापुर चौक के आसपास खूब चटकारे लगाकर लोग चर्चा कर रहे हैं। एक पॉश कालोनी में जुआं पकड़ने और पड़ोस के ही एक थाने के जिला बदर की यहां मौजूदगी के बावजूद पूरा मामला रफा-दफा कर खूब सुर्खियां बटोरने वाले साहब को हाल ही में लाइन भेज दिया गया है।

उन्हें लाइन क्यों भेजा, इस बात को लेकर चर्चा चल रही है उसका लब्बोलुआब यह है कि साहब और उनके साथियों के द्वारा की जाने वाले करतूते एकदम निचले स्तर पर पहुंच गई थी। वे भूल बैठे कि एक थानेदार है और उनके द्वारा ईट के नाम पर महज एक नोट ले लिया, बस यही बवाल उनकी रवानगी का कारण बन गया है। चर्चा है कि एक माननीय तक भी यह बात पहुंच गई तो उन्होंने भी सख्त नाराजगी जताई। बड़े साहब को आनन फानन में थानेदार को लाइन भेजकर दूसरे को जिम्मेदारी देना पड़ गया।

डीजीपी के आदेश की अवहेलना

डीजपी ने पिछले सप्ताह स्पष्ट तौर पर अधीनस्थों को हिदायत दी थी कि फील्ड के अलावा प्रमुख अधिकारियों के कार्यालय में वर्षों से जमे पुलिसकर्मियों को तत्काल बदले। इसके बावजूद बैतूल में डीजीपी के इस आदेश का पालन नहीं हो रहा है। चर्चा है कि एसपी और एसडीओपी कार्यालय में तो वर्षों से बड़ी तादाद में एसआई से लेकर आरक्षक तक के पुलिसकर्मी अंगद की पांव की तरह जमे हुए हैं। उन्हें वर्षों बाद भी इधर से उधर न करना मुंह चिढ़ाने जैसा साबित हो रहा है, जबकि डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ऐसे कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाया। अब देखना यह है कि अंगद की पांव की तरह जमे इन कर्मचारियों को अभयदान मिलता है या रवानगी होती है।

रिटायरमेंट के पहले बल्ले-बल्ले

एक निकाय की स्वच्छता शाखा के प्रभारी का रिटायरमेंट कुछ माह में होने वाला है। इसके पहले वे अपने साथी एक अन्य निरीक्षक के साथ फीलगुड महसूस करने से पीछे नहीं हट रहे। चर्चा है कि लाखों के बजट वाली शाखा में विपक्षी पार्षदों ने भी मोर्चा खोलकर जानकारी मांगी थी तो जैसे-तैसे मामला रफा-दफा कर दिया। एक बार फिर रिटायरमेंट के पहले अपने सहयोगी के साथ किए जा रहे फीलगुड को लेकर सत्ता पक्ष पार्टी के पार्षद भी मोर्चा खोल रहे हैं।

छोटे-छोटे काम के लिए पार्षदों को परेशान किया जा रहा है। नालियों की सफाई से लेकर अन्य मामलों में भी फीलगुड के कारण दोनों अधिकारी तवज्जों नहीं दे रहे हैं। चर्चा है कि मामले को लेकर शिकायत विधायक और कलेक्टर को भी की जा रही है। यदि ऐसा हुआ तो रिटायरमेंट के पहले साहब और उनके सहयोगी के लेने-देने पड़ जाएंगे।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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