Betul News: खेतों की रखवाली कर रहे कोबरा की अचानक मौत से किसान परिवार पर टूटा वज्रपात
Betul News: The farmer's family was shocked by the sudden death of the cobra guarding the fields

रीतिरिवाजों से किया अंतिम संस्कार, खेत में चबूतरा और तांबे की प्रतिमा करेंगे स्थापित
Betul News: बैतूल। यह घटना दिल को छू लेने वाली है। जहां वर्षों से खेत में रह के बिना किसी को नुकसान पहुंचाएं विचरण करने वाले एक उम्रदराज कोबरा की मौत पर किसान परिवार गमगीन हो गया । अनजाने में हुई कोबरा की मौत के बाद दुखी किसान परिवार ने पूरे रीति-रिवाजों के साथ कोबरा का अंतिम संस्कार कर दिया। एक जीव के लिए किसान के परिवार की यह संवेदनशीलता यह बताती है कि इंसान और प्रकृति के बीच कितना गहरा संबंध हो सकता है।
घटना का शिकार बना बूढ़ा कोबरा
किसान संतोष अड़लक ने बताया कि उनकी बुआ लीला बाई वागद्रे की कृषि भूमि आठनेर विकासखंड के ग्राम बाकुड़ में स्तिथ है। खेती में वर्षों से कोबरा सांप निवास कर रहा था। समय के साथ कोबरा इतना उम्रदराज हो चुका था कि उसके शरीर बार बाल तक उग आए थे। लगभग 12 फिट लंबा कोबरा पूरे खेत मे विचरण किया करता था, लेकिन इतने वर्षों में न कभी किसी पर हमला किया औऱ न किसी को नुकसान पहुंचाया। करीब चार दिन पहले खेत बनाने के लिए ट्रेक्टर चलवाया जा रहा था।
शायद ईश्वर ने भगवान भोलेनाथ के गले का हार कहलाने वाले कोबरा की उम्र इतनी ही लिखी थी। अचानक कोबरा ट्रेक्टर के पहिए की चपेट में आ गया। जैसे ही ट्रेक्टर चालक ने कोबरा का विकराल रूप देखा मौके से भाग खड़ा हुआ और इसकी सूचना खेत मालिक को दी गई। हादसे में कोबरा अंतिम सांस ले चुका था। कोबरा की मौत का समाचार सुनते ही परिवार के लोग दुखी हो गए, क्योंकि वर्षों से खेत मेें रह रहा कोबरा किसान परिवार के लिए किसी रखवाले से कम नहीं था।
परिजनों ने कोबरा का किया अंतिम संस्कार
संतोष ने बताया कि कोबरा की मौत होने के बाद परिजनों ने परिवार के पुरोहित को भी इसकी जानकारी दी थी। पुरोहित के बताए अनुसार परिवारजनों ने खेत में ही कोबरा का पूरे रीतिरिवाज से अंतिम संस्कार किया और अस्थियां भी बकायदा नदी में विसर्जित की गई। परिजनों का कहना है कि खेत में निवासरत कोबरा एक तरह से हमारे परिवार का ही हिस्सा बन चुका था। हिन्दू रीति-रिवाजों के मुताबिक अंतिम संस्कार किया गया है। अब खेत मे उनके नाम का चबूतरा निर्माण कर तांबे की प्रतिमा स्थापित की जाएगी, ताकि देवलोक गमन के बाद परिवार के इस सदस्य की यादे हमेशा जिंदा रह सकें। कोबरा को परिवार का हिस्सा मानना और उसके सम्मान में खेत में चबूतरा बनाना यह एक अनूठी और संवेदनशील पहल है। ऐसे उदाहरण पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता की मिसाल बन सकते हैं।




