Betul Ki Khabar: बैतूल में सीएम हेल्पलाइन से समस्याओं का समाधान या फिर सज़ा?

 डर के कारण कई लोग शिकायत करने से चूक रहे, दबाव बनाकर शिकायत वापस लेने के तथाकथित प्रयास

Betul Ki Khabar: बैतूल। सीएम हेल्पलाइन 181 को आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू किया गया था। सरकार का उद्देश्य था कि नागरिक बिना किसी डर के अपनी शिकायत सीधे शासन तक पहुंचे सकें और समयबद्ध निराकरण हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे अलग तस्वीर पेश कर रही है। अब 181 कई मामलों में जनता के लिए समाधान से ज़्यादा सज़ा बनती नज़र आ रही है।

181 पर शिकायत दर्ज होते ही संबंधित विभाग के अफसरों और कर्मचारियों पर निराकरण का दबाव बन जाता है। यही कारण है कि कई बार शिकायतकर्ता पर ही शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जाता है। कहीं-कहीं तो शिकायत करना इतना महंगा साबित हो रहा है कि फरियादी को ही कानूनी झंझटों में फंसा दिया जा रहा है।

लॉकअप में डालकर मोबाइल से शिकायत की डिलीट, छेड़ छाड़ का बना दिया आरोपी

ऐसा ही एक मामला मुलताई क्षेत्र से सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग दीनू बारपेटे ने जमीनी विवाद को लेकर पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कार्यवाही ना होने की दशा में उन्होंने सीएम हेल्प लाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद समस्या के समाधान की बजाय बुजुर्ग को कथित तौर पर छेड़छाड़ के आरोप में फंसा दिया गया। परिणाम यह हुआ कि बुजुर्ग को जेल की हवा तक खानी पड़ी। दीनू का कहना है कि, इस मामले को लेकर उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया गया।

उन्होंने तीन बार 181 पर शिकायत की, पुलिस उन्हें उठाकर थाने ले जाती और लॉकअप में डालकर उनके मोबाइल से शिकायत का निराकरण बताकर डिलीट कर दी जाती। अब तो हद हो गई छेड़छाड़ का आरोप तक थोप दिया गया। बताया जा रहा है कि, बुजुर्ग दीनू जेल की हवा खा रहा है। सवाल उठता है कि क्या एक वैध शिकायत की कीमत किसी निर्दोष को जेल भेजना हो सकती है? इसका जवाब आखिर कौन देगा।

181 की ली हेल्प और लग गया लकड़ी चोरी का आरोप

दूसरा मामला भीमपुर क्षेत्र का है, जहां अर्जुन यादव ने 181 का सहारा लिया और यही कार्यवाही उस पर भारी पड़ गई। बताया जा रहा है कि, अर्जुन पहले भी लकड़ी चोरी के आरोपो में शामिल रह चुका है। यानी कि वन विभाग की नजर में वह हिस्ट्री शीटर है, आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारी लकड़ी चोरी के सिलसिले में पूछताछ के लिए अर्जुन को अपने साथ ले जाना चाह रहे थे। लेकिन उस समय अर्जुन अपने परिवार की एक बीमार महिला सदस्य को अस्पताल ले जा रहा था। इसी बात पर रास्ते मे वन कर्मियों और अर्जुन के बीच विवाद हुआ और अर्जुन ने 181 पर शिकायत कर दी।

इसके बाद वन विभाग ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए उस पर लकड़ी चोरी का आरोप लगाकर उसे हिरासत में ले लिया और उसके पिता मस्तराम को लिखित में सूचना दे दी। भले ही अर्जुन लकड़ी चोरी के मामलों में पहले भी लिप्त रहा हो लेकिन यहां उसका कसूर सिर्फ इतना था कि उसने अपनी मजबूरी बताई जिसे वह कर्मियों ने नहीं माना, और मजबूरी में अर्जुन को सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत करने का अधिकार इस्तेमाल करना पड़ा।

इन दोनों मामलों ने 181 की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सीएम हेल्पलाइन वास्तव में जनता के अधिकारों की रक्षा कर पा रही है, या फिर यह कुछ विभागों के लिए शिकायतकर्ताओं को सबक सिखाने का जरिया बनती जा रही है? जरूरत इस बात की है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और फरियादियों को प्रताड़ित करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। अन्यथा, जनता का भरोसा इस व्यवस्था से उठता चला जाएगा और 181, समाधान का माध्यम बनने के बजाय डर और सज़ा का प्रतीक बनकर रह जाएगी।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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