Politics: राजनीतिक हलचल: कौन नारायण है, जो घर के रहे न घाट के?? किस माननीय के बेतुके निर्णय से पार्टी और कार्यकर्ताओं की बढ़ रही फ़जीहत??? कौनसे नेताओं से उल्लू साधने की सीख लेने की चर्चा???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

Politics: Political stir: Who is Narayan, who is neither here nor there?? Due to which honorable's absurd decision, the party and workers are facing increasing embarrassment???

घर के रहे न घाट के नारायण

विपक्षी पार्टी को छोड़ सत्ता पक्ष में फीलगुड करने के सपने देखना सारनी के नारायण को महंगा पड़ गया। स्लीपर सेल के बहकावे में आकर अपने ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद उम्मीद थी कि सत्ता पक्ष के दरवाजे खुल जाएंगे, लेकिन हुआ इसका उलट। स्थानीय नेताओं की नाराजगी के बाद नारायण की राह मुश्किल हो गई। सत्ता पक्ष में शामिल करने के लिए स्थानीय नेताओं ने विरोध किया तो नारायण फिलहाल घर के रहे न घाट के। चर्चा है कि नारायण के बारे में सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं ने तर्क दिया था कि नारायण अस्त्र में कोई दम नहीं है, यह पार्टी में बोझ ही होंगे। यही वजह है कि दो पार्षदों की एंट्री मिलने पर नारायण केवल मुंह देखते रहे और आगे की राह के लिए विकल्प खोज रहे हैं।

माननीय के बेतुके निर्णय से सब परेशान

एक माननीय को कार्यकर्ताओं ने जी-तोड़ मेहनत के बाद जीत दिलाई थी, लेकिन यही जीत उनके लिए परेशानी का सबब बन गई है। चर्चा है कि यह माननीय अपने बेतुके निर्णय और कार्यकर्ताओं से लगातार दूरी बनाए जाने के कारण कार्यकर्ताओं की नाराजगी लगातार बढ़ा रही है। हालत यह है कि केवल चुनिंदा और मुंंह लगे कार्यकर्ताओं को सम्मान मिल पा रहा है। चर्चा है कि इसके बाद कुछ ऐसे निर्णय भी चर्चा का केंद्र बन गए हैं जिससे पार्टी की मुसीबत बढ़ गई है। पहले विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्ति कर उक्त माननीय ने खूब सुर्खियां बटोरी विवाद बढऩे पर सारी नियुक्तियां रद्द करना पड़ा। अब चर्चा जोरों पर है कि यह माननीय कार्यकर्ताओं से दूरियां बनाकर चलने के कारण अपने ही विधानसभा में लगातार पार्टी को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

अपना उल्लू साधना कोई इनसे सीखे

सत्ता को कैसे साधा जाता है और अपना उल्लू कैसे सीधा किया जाता है, राजनीति की इस कला में बहुत कम लोग माहिर होते हैं। ये इतने बड़े नटवरलाल है कि एक पॉवर सेंटर से दूसरे पॉवर सेंटर में शिफ्ट करते समय ऐसा माहौल बना देते हैं कि जिसके यहां शिफ्ट हो रहे उसे महसूस ही नहीं होता है कि कल तक कहीं ओर निष्ठा और दुकानदारी चला रहे थे। जिला मुख्यालय पर वैसे तो राजनीति में कई प्रजाति के लोग मिल जाएंगे, लेकिन विधानसभा चुनाव के पहले किसके सुर क्या थे और अब क्या है। यह चेक करना बड़ा चैलेंज का काम है। शहर में चर्चा है कि यह मुंह के बड़े खिलाड़ी होते हैं और इनमें अफवाह फैलाने, पूरे आत्मविश्वास से झूठ बोलने के साथ दूसरों के खिलाफ भडक़ाने की अद्धबुध क्षमता है। हाल ही में एक माननीय को किसी ने ऐसी ही प्रजाति के लोगों के टेलेंट से परिचित कराया।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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