Sanjhveer News – राजनीतिक हलचल: विपक्षी पार्टी में कौन डाल रहा आग में घी?? बरगद के नीचे फलने, फूलने का आखिर क्या है माजरा??? माननीय और पंचायत प्रतिनिधि के बीच प्रतिद्वंदता क्या गुल खिलाएगी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में….

Sanjhveer News – कौन डाल रहा आग में घी?

एक प्रमुख विपक्षी पार्टी में इन दिनों स्लीपर सेल जमकर आग में घी डालने का काम कर रही है। अब तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन दो बड़े नेताओं ने आपस में हाथ मिलाकर जिला संगठन को बेपटरी करने के लिए जो रणनीति बनाई, इसमें कामयाबी के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाएं जा रहे हैं। स्लीपर सेल के कुछ जिम्मेदार मीडिया को भी मनगढ़त कहानी बताकर बरगलाने का तथाकथित प्रयास कर रहे हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को इस बात को समझना होगा कि जिले में स्लीपर सेल किस तरह दीमक की तरह पार्टी को बर्बाद करने पर तुली हुईहै। यह बात चौक चौराहें पर भी सुनी जा रही है कि स्लीपर सेल आर्थिक स्थिति मजबूत होने के कारण पार्टी को बर्बाद करने और अपने लोगों को उपकृत करने के लिए भोपाल से लेकर दिल्ली तक दौरा कर आई है, लेकिन उन्होंने मुंह की खानी पड़ी है, इसलिए अब मनगढ़त बातें गढ़ कर अपनी ही पार्टी के नेताओं का चि_ा खोलने में कोई असर नहीं छोड़ी जा रही है। इससे पार्टी का जनाधार लगातार गिरते जा रहा है।

बरगद के नीचे फलने फूलने का मुगालते पाल बैठी जोड़ी

विपक्ष में एक पिता-पुत्र की जोड़ी बरगद के नीचे बैठकर अपने फलने- फूलने के मुगालते पाल बैठी है। पिता रिटायर्ड कर्मचारी है और उन्हें एक विंग की भी जिम्मेदारी मिली है। हालांकि वे कभी उस विंग के नाम पर कुछ कर नहीं पाए। दूसरी ओर उनके राजनीति में सक्रिय पुत्र राजा बाबू टाइप पुत्र बेरोजगार होने के कारण फिलहाल राजनीति में बेरोजगार है। पिछले पंचायती चुनाव में तगड़ा झटका खाने के बावजूद उनमें कोई स्पार्क ही नजर नहीं आ रहा है। मसलन छोटे-मोटे मामलों में वे जिस क्षेत्र से चुनाव लड़े, वहां के मुख्यालय पर जाकर प्रदर्शन करना नहीं चूक रहे हैं, लेकिन उनके साथ कितने लोग जुटे यह देखने लायक था। राजनीति में चर्चा चल रही है कि पिछले चुनाव में पिता-पुत्र को मिली जिम्मेदारी से कितने गदगद थे, लेकिन उनके क्षेत्र में जिस तरह से गड्ढा हुआ, इसके बाद चेहरा देखने लायक था। फिलहाल इस युवा नेता की राजनीति के मायने ही समझ से परे हैं।

क्या गुल लिखाएगा इनकी राजनीतिक प्रतिद्वंदता

जिले की राजनीति में इस समय एक बड़े पंचायत प्रतिनिधि और एक माननीय के बीच 36 के आंकड़ ने पार्टी को चिंता में डाल दिया। सत्तारूढ़ पार्टी के यह वरिष्ठ माननीय और पंचायत प्रतिनिधि के बीच 36 का आंकड़ा नई बात नहीं है, लेकिन उनके क्षेत्र में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों में जिस तरह पंचायत प्रतिनिधि की उपेक्षा की जा रही है। इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधि के साथ उनके अधीनस्थ जनपद अध्यक्ष को भी माननीय बिलकुल तवज्जों नहीं दे रहे हैं। इसके पीछे तर्क क्या है? कोई नहीं समझ रहा है, लेकिन जानकार बताते हैं कि माननीय के साथ पंचायत प्रतिनिधि को तवज्जों न देकर क्षेत्र के अधिकारी खुद विवादों में घिर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में इस विस क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री के हस्ते हुए लोकार्पण-भूमिपूजन में पंचायत प्रतिनिधि को जिस तरह से नजर अंदाज किया है, इससे सत्तारूढ़ पार्टी में बड़ी हलचल मची है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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