Betul Samachar: ऑनलाईन पेमेंट बना पुलिस विभाग के गले की फांस भारतीय मुद्रा स्वीकार नहीं करना राजद्रोह, क्या कानून से ऊपर हो गए नियम

Betul Samachar: Online payment has become a thorn in the neck of the police department, not accepting Indian currency is treason, have the rules become above the law?

Betul Samachar: बैतूल। यह शाश्वत सत्य है कि कैश लेन-देन का देश की अर्थव्यवस्था पर विपरित असर पड़ता है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा अपने सभी वित्तीय संस्थानों में नकद लेन-देन बंद कर केवल ऑनलाईन पेमेंट ही लिए जाने का फरमान जारी किया गया। जिसका असर पिछले कुछ दिनों से बैतूल के पुलिस पेट्रोल पंप पर भी दिख रहा है। अब पेट्रोल पंप के ठीक बाजू में संचालित हो रहे कैंटीन में भी नकदी का लेन-देन प्रतिबंधित हो चुका है। हालांकि इस कैंटीन के जरिए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को ही रियायती दामों पर रोजमर्रा की सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस मुख्यालय का यह फरमान आखिर कितना गलत है और कितना सही है।

इस पूरे मामले में कानून के जानकार नकदी स्वीकार नहीं किए जाने के इस आदेश को कानून के खिलाफ बता रहे हैं। मुख्यालय से जारी इस आदेश का पालन पुलिस अधिकारियों की मजबूरी बन चुका है। अब हालत यह हैं कि नकद लेन-देन करने वाले उपभोक्ता पंप से बैरंग वापस लौट रहे हैं। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर भी पड़ रहा है। संभावना जताई जा रही है कि कहीं ऑनलाईन पेमेंट के चक्कर में पुलिस विभाग के सामने पेट्रोल पंप को बन्द करने की नौतब न आ जाएं।

जानकार बोलें-कानून से ऊपर नहीं हो सकते नियम

हाल ही में पुलिस मुख्यालय भोपाल से जारी आदेश में कहा है कि प्रदेश के जिलों में पुलिस विभाग के जितने भी पेट्रोल पंप और वित्तीय संस्थान हैं, उन संस्थानों में नकद का लेन-देन ना किया जाए। उपभोक्ताओं से केवल ऑनलाईन पेमेंट ही स्वीकार किए जाएं। जैसे ही बैतूल पुलिस को आदेश मिला, इसका क्रियान्वयन भी शुरू कर दिया गया। हालात यह हैं कि पुलिस पेट्रोल पंप और पुलिस कैंटीन में नगद लेन-देन करने वाले उपभोक्ताओं को बैरंग वापस भेजा जा रहा है।

इस मामले को लेकर कानूनविदों से राय पूछी गई तो उन्होंने पुलिस के इस कदम को सीधे-सीधे राजद्रोह करार दे दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता आकाश श्रीवास्तव ने जानकारी स्पष्ट करते हुए बताया कि ऑनलाईन ट्रांजेक्शन को लेकर कोई भी संस्थान एक तरफा निर्णय तभी ले सकता हैं, जब विभाग या संस्थान के पास इसकी विधिवत अनुमति हो। अब यह अनुमति सरकार से ली जाएं या फिर रिजर्व बैंक से। अनुमति के बाद ही मुद्रा अस्वीकार किए जाने का निर्णय लिया जा सकता है। इसके लिए विभाग को नियम भी तय करने होंगे। यदि पुलिस मुख्यालय ने बिना अनुमति लिए नियम बनाकर भारतीय मुद्रा का नकद लेन-देन प्रतिबंधित किया है तो यह अपराध है, क्योंकि कानून से ऊपर नियम नहीं हो सकते।

आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान, पुलिस को ही लिखनी होगी एफआईआर

अधिवक्ता आकाश श्रीवास्तव ने बताया कि भारतीय मुद्रा का लेन-देन अस्वीकार किया जाना पूर्व में आईपीसी की धारा 124 का उल्लंघन माना गया था, लेकिन हाल ही हुए बदलाव के चलते भारतीय न्याय सहिंता में धारा बदलकर 111, 112 कर दी गई है। इस धारा के अंतर्गत मुद्रा को स्वीकार नहीं करना राजद्रोह की श्रेणी में आता है। इसमें 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। खास बात यह है कि यदि कोई व्यक्ति इस संबंध में शिकायत करता है तो शिकायत भी स्वयं पुलिस को ही लिखनी पड़ेगी। आरोपी भी संस्थान के सेल्समेन और संचालक को ही बनाना पड़ेगा।

यूपीआई का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति या संस्था भारतीय मुद्रा लेने से इनकार नहीं कर सकता। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि आदेश जहां अधिकारियों की मजबूरी बन चुका है तो वहीं पुलिस को मिलने वाले राजस्व का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है, जिसका सीधा असर उस वेलफेयर पर पड़ेगा। जिसके जरिए लाखों पुलिसकर्मी लाभांवित भी हो रहे हैं।

इनका कहना

पुलिस मुख्यालय से मिले आदेश का पालन किया जा रहा है। बेशक राजस्व में नुकसानी तो उठाना पड़ेगा, लेकिन अंतिम निर्णय लेने का अधिकार हमें नहीं, बल्कि पुलिस मुख्यालय का ही है।

निश्चल एन झारिया, एसपी बैतूल

भारतीय मुद्रा स्वीकार न करना अपराध की श्रेणी में आता है। बीएनएस की धारा 111, 112 के तहत 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

एड. आकाश श्रीवास्तव, जिला न्यायालय बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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