Betul Ki Khabar : स्कूलों में लगने वाले इंटरएक्टिव पैनल सिस्टम खा रहे धूल
Betul Ki Khabar : Interactive panel systems installed in schools are gathering dust

79 में से 38 स्कूलों में ही लग पाए बोर्ड, डिजीटल शिक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं
Betul Ki Khabar : बैतूल। जिले के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा देने के लिए शासन ने जो योजना बनाई है, वह पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतरी है। जिले के कई स्कूलों के लिए स्मार्ट इंटरएक्टिव पैनल दिए गए है। यह सभी स्कूलों में अभी तक नहीं लग पाए है। इसके संचालन को लेकर शिक्षकों को कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। स्कूलों में पहुंचे यह इंटरएक्टिव पैनल अनुपयोगी पड़े है। विद्यार्थियों को मिलने वाली डिजिटल शिक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक लाखों रूपए के इंटरएक्टिव पैनल स्कूलों को उपलब्ध कराए है। बैतूल जिले में कुल 79 स्कूलों को इंटरएक्टिव पैनल मिले है। जिसमें से 79 स्कूलों और तीन छात्रावास में इंटरएक्टिव पैनल लग पाए है। शेष इंटरएक्टिव पैनल स्कूलों में धूल खा रहे है। अभी तक इनका इंस्टालेशन नहीं हो पाया है। शासन के निर्देश है कि डिजिटल शिक्षा के लिए यह सिस्टम स्कूलों में लगाए जाए, लेकिन अब तक स्कूलों में पूरी तरह से सिस्टम नहीं लगे है। अब अधिकारी अपनी जवाबदारी से पल्ला झाड़ने में लगे हुए है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे निर्देश आ रहे है, वैसे इंटरएक्टिव पैनलों को स्कूलों में लगाने का काम किया जा रहा है।
यह है इंटरएक्टिव पैनल
स्कूलों में डिजिटल शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ब्लेक बोर्ड की जगह अब इंटरएक्टिव पैनल लगाए जा रहे है। इससे ग्राफिक्स विजुअल उदाहराणत्मक विवरण के माध्यम से डिजिटल सीखने की सुविधा प्रदान करने के लिए डिजाईन किया है। यह बेहतर समझ के लिए विविध डिजिटल संसाधन प्रदान करके सीखने की क्षमताओं को बढ़ाने में सक्षम है। इस सिस्टम को कम्प्यूटर टेबलेट सहित अन्य स्मार्ट फोन से भी आसानी से कनेक्ट किया जा सकता है। कई स्कूलों में यह सिस्टम लग जाने थे, लेकिन अभी तक कई स्कूलों में यह सिस्टम नहीं लग पाए है। जितने सिस्टम जिले को उपलब्ध हुए है, उतने भी नहीं लगे है।
शिक्षकों को नहीं दिया कोई प्रशिक्षण
कुछ स्कूलों में यह नए सिस्टम लग चुके है, लेकिन यहां शिक्षकों को सिस्टम चलाने के लिए कोई प्रशिक्षण नहीं दिया है। ऐसे में शिक्षकों को सिस्टम चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह सिस्टम स्मार्ट फोन जैसा है। इसमें प्रशिक्षण देने की कोई जरूरत नहीं है। शिक्षक मोबाईल की तरह अपने आप ही चलाना सीख जाएंगे। यह सिस्टम स्मार्ट टीवी की तरह काम करता है, इसका प्रशिक्षण देना आवश्यक है। इसके बाद ही शिक्षक इसे अच्छे से चला पाएंगे, लेकिन जिले में किसी को भी प्रशिक्षण नहीं दिया है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है, जहां यह नए सिस्टम लगे है, वहां कैसे पढ़ाई होती होगी।
इनका कहना…
79 इंटरएक्टिव पैनल जिले को उपलब्ध हुए है। 39 स्कूल और 3 छात्रावास में यह सिस्टम लगा दिए है। जिस तरह से शासन की तरफ से आदेश आ रहे है, वैसे स्कूलों में सिस्टम लगाने का काम किया जा रहा है। इस सिस्टम को चलाने के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण की जरूरत नहीं है।
संजीव श्रीवास्तव, डीजीपीसी, बैतूल





